BOMBAY HC: पत्नी की स्थानांतरण याचिका खारिज, कोर्ट ने बताया देरी करने की रणनीति — वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से पेशी का विकल्प खुला

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BOMBAY HC: Wife’s transfer petition rejected, court calls it a delaying tactic – Option of appearance through video conferencing open

बॉम्बे हाईकोर्ट ने उस पत्नी की स्थानांतरण याचिका खारिज कर दी है, जिसने पुणे फैमिली कोर्ट PUNE FAMILY COURT में चल रही तलाक की कार्यवाही को उस्मानाबाद स्थानांतरित करने की मांग की थी। न्यायमूर्ति कमल खता की एकल पीठ ने कहा कि यह स्थानांतरण आवेदन कार्यवाही में देरी करने की एक रणनीतिक कोशिश है और प्रक्रिया का ऐसा दुरुपयोग स्वीकार नहीं किया जा सकता

🔹 पृष्ठभूमि:

पति द्वारा पुणे की फैमिली कोर्ट में तलाक DIVORCE की याचिका दायर की गई थी। पत्नी ने इसे उस्मानाबाद स्थानांतरित करने की मांग की, यह कहते हुए कि—

  • वह वहीं रह रही है,
  • आर्थिक रूप से स्वतंत्र नहीं है,
  • मधुमेह, उच्च रक्तचाप और बवासीर से पीड़ित है,
  • यात्रा खर्च प्रति पेशी ₹10,000 तक आता है।

🔹 पति का पक्ष:

  • वह निजी नौकरी करता है और बीमार माँ की देखभाल भी उसी पर है।
  • कार्यवाही अंतिम बहस के चरण में है।
  • पत्नी के वकील नियमित रूप से पेश हो रहे हैं।
  • फैमिली कोर्ट में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की सुविधा उपलब्ध है।
  • वह पत्नी के यात्रा खर्च के लिए ₹5000 प्रति पेशी देने को तैयार है।

🔹 न्यायालय का विश्लेषण:

  • पत्नी पहले कई बार पुणे कोर्ट में पेश हो चुकी है।
  • उसका आचरण कार्यवाही को जानबूझकर लंबा खींचने वाला है।
  • उसके द्वारा दिए गए तर्क अस्पष्ट, परस्पर विरोधी और अविश्वसनीय थे।
  • पति की कठिनाई ज्यादा गंभीर है क्योंकि उसे बीमार माँ की देखभाल करनी है।
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न्यायालय ने अभिलाषा गुप्ता बनाम हरिमोहन गुप्ता (2021) का हवाला देते हुए कहा कि जब मामला अंतिम चरण में हो, तो स्थानांतरण नहीं किया जाना चाहिए।

🔹 आदेश:

  • याचिका खारिज।
  • पत्नी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से पेश होने के लिए स्वतंत्र।
  • पति को निर्देश कि जब भी पत्नी की व्यक्तिगत उपस्थिति आवश्यक हो, वह ₹5000 यात्रा खर्च दे।
  • फैमिली कोर्ट को कार्यवाही तीन महीने के भीतर पूरी करने का निर्देश।

[Amrutwa Sachin v. Vividha Sachin | Misc. Civil Application No. 51/2025 | Judgment Date: 01-08-2025]

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