बेल्जियम कोर्ट ऑफ कैसेशन 9 दिसंबर को मेहुल चौकसी की अपील पर सुनवाई करेगी। कोर्ट केवल कानूनी सवालों की समीक्षा करेगी और कोई नए तथ्य स्वीकार नहीं करेगी। यह सुनवाई एंटवर्प कोर्ट ऑफ अपील्स के उस फ़ैसले के बाद हो रही है जिसने चौकसी के खिलाफ भारत के प्रत्यर्पण अनुरोध को वैध माना था।
बेल्जियम की सर्वोच्च अदालत 9 दिसंबर को सुनेगी मेहुल चौकसी की अपील, कोर्ट सिर्फ कानूनी पहलुओं की करेगी समीक्षा
बेल्जियम की कोर्ट ऑफ कैसेशन 9 दिसंबर को मेहुल चौकसी की अपील सुनेगी, एडवोकेट जनरल ने पुष्टि की
भारत के आर्थिक अपराधी मेहुल चौकसी के प्रत्यर्पण मामले में एक महत्वपूर्ण विकास हुआ है। बेल्जियम की कोर्ट ऑफ कैसेशन (सर्वोच्च न्यायालय) 9 दिसंबर को चौकसी की अपील पर सुनवाई करेगी। यह जानकारी बेल्जियम के कोर्ट ऑफ कैसेशन के एडवोकेट जनरल हेनरी वेंडरलिंडन ने ANI को दिए अपने आधिकारिक संचार में पुष्टि की।
वेंडरलिंडन ने स्पष्ट किया कि कोर्ट ऑफ कैसेशन की प्रक्रिया पूरी तरह लिखित (written proceedings) पर आधारित होती है—
- सभी शिकायतें अपील दाखिल करते समय ही प्रस्तुत की जा सकती हैं।
- बाद में कोई नई दलीलें या तथ्य शामिल नहीं किए जा सकते।
- अदालत यह नहीं देखती कि तथ्य सही हैं या नहीं, बल्कि यह देखती है कि कानून सही लागू हुआ या नहीं।
इस प्रकार, यह सुनवाई सिर्फ कानूनी आधारों तक सीमित होगी, न कि सबूतों या घटनाक्रम की पुन: जांच तक।
🔹 एंटवर्प कोर्ट ऑफ अपील्स का फैसला चौकसी के खिलाफ
यह अपील उस निर्णय के खिलाफ है जिसमें एंटवर्प कोर्ट ऑफ अपील्स ने कहा था कि:
- चौकसी पर लगाए गए आरोप — साज़िश, धोखाधड़ी, गबन, जालसाज़ी —
भारत और बेल्जियम दोनों देशों में अपराध माने जाते हैं। - इससे dual criminality की शर्त पूरी होती है, इसलिए प्रत्यर्पण वैध है।
- IPC की धारा 120-B, 409, 420, 477-A, और भ्रष्टाचार निवारण कानून की धाराएं दोनों देशों में दंडनीय हैं।
हालांकि कोर्ट ने IPC की धारा 201 (सबूत मिटाने) को बाहर रखा क्योंकि इसका बेल्जियम क़ानून में कोई समकक्ष अपराध नहीं है।
कोर्ट ने यह भी माना कि प्रस्तावित अपराधों की समयसीमा (limitation) भारत और बेल्जियम दोनों में नहीं बीती है।
🔹 राजनीतिक उत्पीड़न का दावा खारिज
चौकसी ने यह दावा किया था कि भारत राजनीतिक कारणों से उसका प्रत्यर्पण चाहता है।
एंटवर्प कोर्ट ने इसे सिरे से खारिज करते हुए कहा:
- आरोप राजनीतिक या सैन्य प्रकृति के नहीं हैं
- न ही कोई ऐसा दस्तावेज है जो नस्ल, धर्म, राष्ट्रीयता या राजनीतिक वजहों से उत्पीड़न का संकेत दे
कोर्ट ने चौकसी के अपहरण के दावे को भी अस्वीकार कर दिया, यह कहते हुए कि:
उपलब्ध दस्तावेज़ इस बात का कोई लक्षण नहीं देते कि उसे भारत की ओर से अपहरण कराया गया था।
🔹 भारतीय जेलों की स्थिति पर चौकसी के तर्क भी खारिज
चौकसी ने भारतीय जेलों की स्थिति पर मीडिया रिपोर्टें, NGO रिपोर्टें और केस लॉ प्रस्तुत किए थे।
कोर्ट ने कहा:
- इनमें से कोई भी व्यक्तिगत, वास्तविक, और गंभीर खतरे का प्रमाण नहीं देता
- न ही यह दर्शाता है कि भारत में उसे यातना, अमानवीय व्यवहार, या “flagrant denial of justice” का जोखिम है
भारतीय अधिकारियों द्वारा बेल्जियम को दी गई विस्तृत आश्वासन रिपोर्ट में कहा गया था कि:
- चौकसी को मुंबई की आर्थर रोड जेल, बैरक नंबर 12 में रखा जाएगा
- 46 वर्गमीटर के इस परिसर में दो सेल और निजी स्वच्छता सुविधाएं हैं
- उसकी निगरानी न्यायिक अभिरक्षा में होगी, न कि जांच एजेंसियों के नियंत्रण में
- आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध रहेंगी
कोर्ट ने माना कि प्रत्यर्पण के बाद भी उसके स्वास्थ्य और मानवाधिकारों पर कोई खतरा नहीं होगा।
🔹 पृष्ठभूमि: पंजाब नेशनल बैंक मामला
चौकसी, अपने भांजे नीरव मोदी के साथ मिलकर, PNB घोटाले में ₹13,000 करोड़ से अधिक की धोखाधड़ी का आरोपी है।
उसे भारत के प्रत्यर्पण अनुरोध पर 11 अप्रैल 2025 को एंटवर्प में गिरफ्तार किया गया था।
उसकी कई जमानत याचिकाएं बेल्जियम अदालतों द्वारा पहले ही खारिज की जा चुकी हैं।
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