बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश के लखनऊ जनपद से जुड़े चुनाव रद्द होने के बाद पुनर्मतदान की तैयारी शुरू हो गई है। हाई कोर्ट लखनऊ खंडपीठ की निगरानी में होने वाले चुनाव के दौरान प्रत्याशी अधिवक्ताओं के लिए बार काउंसिल गेस्ट हाउस की सुविधा उपलब्ध नहीं होगी।
बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश के चुनाव को लेकर लखनऊ जनपद से जुड़ा एक अहम प्रशासनिक आदेश सामने आया है। पहले से निरस्त किए जा चुके लखनऊ जनपद के मतदान को दोबारा कराने की प्रक्रिया अब औपचारिक रूप से शुरू कर दी गई है। इस संबंध में बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश, प्रयागराज की ओर से जारी सूचना में स्पष्ट किया गया है कि प्रस्तावित पुनर्मतदान की तिथियों के दौरान चुनावी प्रक्रिया को निष्पक्ष और सुचारु रूप से संपन्न कराने के लिए विशेष व्यवस्थाएं की जा रही हैं।
जारी सूचना के अनुसार, लखनऊ जनपद से संबंधित बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश का चुनाव पहले ही हाई पावर इलेक्शन कमेटी द्वारा निरस्त किया जा चुका है। अब जनपद लखनऊ में पुनः मतदान कराया जाना प्रस्तावित है। इसके लिए 23, 24, 25 और 26 फरवरी 2026 की तिथियां तय की गई हैं, जिन्हें माननीय सर्वोच्च न्यायालय की स्वीकृति के लिए भेजा गया है। बार काउंसिल को उम्मीद है कि इन तिथियों को मंजूरी मिल जाएगी।
हाई कोर्ट की निगरानी में होगा पुनर्मतदान
सूचना में यह भी स्पष्ट किया गया है कि लखनऊ में पुनर्मतदान की प्रक्रिया माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद, लखनऊ खंडपीठ के नामित अधिकारियों की सहायता से कराई जाएगी। चुनाव को शांतिपूर्ण और निष्पक्ष तरीके से संपन्न कराने के लिए बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश के लगभग 25 कर्मचारी लखनऊ भेजे जाएंगे, जो बार काउंसिल के गेस्ट हाउस में ठहरेंगे और चुनावी कार्यों में सहयोग करेंगे।
इसके साथ ही यह भी बताया गया है कि माननीय निर्वाचन अधिकारी, माननीय पर्यवेक्षक, सचिव/चुनाव अधिकारी तथा अन्य कर्मचारी कुल मिलाकर लगभग पांच दिनों तक लखनऊ कैंप कार्यालय में रुककर चुनाव प्रक्रिया को पूरा कराएंगे। यह व्यवस्था चुनाव के दौरान प्रशासनिक नियंत्रण और निगरानी को मजबूत करने के उद्देश्य से की जा रही है।
प्रत्याशी अधिवक्ताओं के लिए गेस्ट हाउस पर रोक
सूचना का सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील हिस्सा प्रत्याशी अधिवक्ताओं से जुड़ा है। आदेश में स्पष्ट शब्दों में कहा गया है कि माननीय निर्वाचन अधिकारी एवं माननीय पर्यवेक्षक के निर्देशानुसार, वर्तमान चुनाव में जो पूर्व सदस्य प्रत्याशी भी हैं, उनके लिए लखनऊ स्थित बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश का गेस्ट हाउस उपलब्ध नहीं रहेगा।
इसका अर्थ यह है कि चुनाव लड़ रहे अधिवक्ताओं को ठहरने की व्यवस्था स्वयं करनी होगी। बार काउंसिल ने स्पष्ट किया है कि यह निर्णय पूरी तरह से चुनावी निष्पक्षता बनाए रखने और किसी भी प्रकार के आरोप या विवाद से बचने के लिए लिया गया है। चुनावी दृष्टिकोण से प्रत्याशियों को किसी भी प्रकार की विशेष सुविधा न दिए जाने की नीति को सख्ती से लागू किया जा रहा है।
क्यों अहम है यह आदेश?
बार काउंसिल चुनाव अक्सर संवेदनशील माने जाते हैं और उन पर न्यायिक निगरानी भी रहती है। लखनऊ जनपद का चुनाव पहले ही निरस्त हो चुका है, ऐसे में पुनर्मतदान के दौरान हर प्रशासनिक कदम पर अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है। गेस्ट हाउस की सुविधा से प्रत्याशियों को दूर रखना इसी नीति का हिस्सा माना जा रहा है, ताकि चुनाव प्रक्रिया पर किसी प्रकार का पक्षपात या प्रभाव डालने का आरोप न लगे।
बार काउंसिल की ओर से यह सूचना सम्मानित पूर्व सदस्यों और लखनऊ स्थित गेस्ट हाउस के कर्मचारियों को भी प्रेषित की गई है, ताकि सभी संबंधित पक्ष पहले से अवगत रहें और किसी प्रकार की असुविधा या भ्रम की स्थिति न बने।
निष्कर्ष
लखनऊ बार काउंसिल चुनाव से जुड़ा यह आदेश साफ संकेत देता है कि बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश और चुनाव प्राधिकरण इस बार प्रक्रिया को लेकर कोई ढिलाई नहीं बरतना चाहते। सुप्रीम कोर्ट की संभावित मंजूरी, हाई कोर्ट की निगरानी और प्रत्याशियों के लिए सख्त नियम — ये सभी कदम आने वाले पुनर्मतदान को कानूनी रूप से मजबूत और विवाद-मुक्त बनाने की दिशा में अहम माने जा रहे हैं।

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