अनिल डी. अंबानी ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर कहा कि वे केवल नॉन-एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर थे
₹1.5 लाख करोड़ कथित बैंक फ्रॉड मामले में अनिल डी. अंबानी ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर कहा कि वे केवल नॉन-एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर थे। विदेश न जाने और जांच में सहयोग का दिया आश्वासन।
₹1.5 लाख करोड़ के कथित बैंक धोखाधड़ी मामले में उद्योगपति Anil D Ambani ने सुप्रीम कोर्ट में एक विस्तृत अनुपालन हलफनामा दाखिल कर स्पष्ट किया है कि संबंधित कंपनियों में उनकी भूमिका केवल ‘नॉन-एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर’ की थी और वे दैनिक प्रबंधन या परिचालन कार्यों में शामिल नहीं थे।
यह हलफनामा जनहित याचिका EAS Sarma vs Union of India & Ors में दायर किया गया है, जिसमें पूर्व आईएएस अधिकारी E. A. S. Sarma ने अनिल अंबानी समूह की कंपनियों से जुड़े कथित बैंक फ्रॉड की न्यायालय-निगरानी में जांच की मांग की है।
‘नॉन-एग्जीक्यूटिव भूमिका, संचालन में दखल नहीं’
हलफनामे में अंबानी ने कहा है कि वे मामले के तथ्यों से पूर्णतः अवगत हैं और शपथपत्र दाखिल करने के लिए सक्षम हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह हलफनामा न्यायालय के रिकॉर्ड में तथ्यात्मक स्थिति और प्रक्रियात्मक पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से दायर किया गया है।
उन्होंने दोहराया कि संबंधित कंपनियों में उनकी भूमिका सीमित थी और वे रोजमर्रा के निर्णयों या परिचालन मामलों में शामिल नहीं थे।
विदेश यात्रा पर रोक का आश्वासन
सुप्रीम कोर्ट के 4 फरवरी 2026 के आदेश का उल्लेख करते हुए अंबानी ने कहा कि वे बिना अदालत की पूर्व अनुमति देश नहीं छोड़ेंगे। इस आश्वासन को अब औपचारिक रूप से हलफनामे के माध्यम से रिकॉर्ड पर रखा गया है।
उन्होंने शपथपूर्वक कहा कि जुलाई 2025 में जांच शुरू होने के बाद से वे भारत से बाहर नहीं गए हैं और फिलहाल विदेश यात्रा की कोई योजना नहीं है। यदि भविष्य में ऐसी आवश्यकता उत्पन्न होती है, तो वे पहले सुप्रीम कोर्ट से अनुमति मांगेंगे।
‘फ्लाइट रिस्क नहीं’— PMLA के तहत पूछताछ जारी
हलफनामे में यह भी उल्लेख है कि वे जांच एजेंसियों के साथ “पूर्ण सद्भावना” के साथ सहयोग कर रहे हैं। उन्हें 26 फरवरी 2026 को प्रवर्तन निदेशालय के समक्ष उपस्थित होने के लिए तलब किया गया है और उन्होंने उस दिन पेश होने का आश्वासन दिया है।
मामले में Directorate of Enforcement द्वारा धनशोधन निवारण अधिनियम, 2002 की धारा 50 के तहत पूछताछ की जा रही है। अंबानी ने दावा किया है कि वे किसी भी प्रकार से कानून की प्रक्रिया से बचने का प्रयास नहीं कर रहे हैं और वे ‘फ्लाइट रिस्क’ नहीं हैं।
सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच
यह मामला उस जनहित याचिका से जुड़ा है, जिसमें कथित तौर पर ₹1.5 लाख करोड़ के बैंक फ्रॉड की जांच की मांग की गई है। सुप्रीम कोर्ट पहले ही केंद्रीय जांच ब्यूरो और प्रवर्तन निदेशालय को स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दे चुका है। मामले की सुनवाई अभी लंबित है।
अंबानी का यह हलफनामा ऐसे समय में आया है जब जांच एजेंसियां वित्तीय लेनदेन, ऋण वितरण और कथित अनियमितताओं की जांच कर रही हैं। उन्होंने अपने बयान में यह भी कहा कि उनका हलफनामा bona fide (सद्भावना से) दायर किया गया है ताकि न्यायालय को सही तथ्यात्मक स्थिति से अवगत कराया जा सके।
हलफनामे के अनुसार, यह दस्तावेज 18 फरवरी 2026 को मुंबई में सत्यापित किया गया।
आगे क्या?
अब सुप्रीम कोर्ट के समक्ष मुख्य प्रश्न यह होगा कि जांच एजेंसियों की स्टेटस रिपोर्ट और अंबानी के आश्वासन के बीच क्या संतुलन बनता है। अदालत यह भी देखेगी कि क्या न्यायालय-निगरानी में जांच की मांग को आगे बढ़ाया जाए या एजेंसियों की मौजूदा प्रक्रिया को पर्याप्त माना जाए।
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