बिना तलाक दूसरी शादी करने वाली महिला 498-ए में ‘पति’ पर केस नहीं कर सकती: पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा कि बिना वैध तलाक के दूसरी शादी करने वाली महिला, कथित दूसरे पति के खिलाफ धारा 498-ए IPC के तहत दहेज उत्पीड़न का मामला नहीं चला सकती। कोर्ट ने फिरोजपुर मजिस्ट्रेट द्वारा जारी समन आदेश रद्द किए।

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने दहेज उत्पीड़न से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए फिरोजपुर के मजिस्ट्रेट द्वारा जारी समन आदेश को रद्द कर दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि कोई महिला बिना पूर्व वैध तलाक लिए दूसरी शादी करती है, तो वह कथित दूसरे पति के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 498-ए के तहत दहेज उत्पीड़न का मामला दर्ज नहीं करा सकती।

मामला क्या था?

शिकायतकर्ता महिला ने फिरोजपुर मजिस्ट्रेट के समक्ष शिकायत दर्ज कराई थी कि उसका विवाह हरजिंदर सिंह से हुआ था और विवाह के बाद उससे दहेज की मांग की गई। शिकायत के अनुसार, डोली के समय कार की मांग की गई थी और परिवार ने तीन लाख रुपये भी दिए थे। इसके बावजूद उसके साथ दहेज के लिए मारपीट और उत्पीड़न जारी रहा।

मजिस्ट्रेट ने प्रारंभिक सुनवाई के बाद समन आदेश जारी कर दिए। इस आदेश को अपील में चुनौती दी गई, लेकिन अपील खारिज हो गई। इसके बाद याची ने वरिष्ठ अधिवक्ता सलिल देव सिंह बाली के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका दायर की।

याची का पक्ष

याची ने हाईकोर्ट को बताया कि शिकायतकर्ता का विवाह वर्ष 2005 में गुरमीत सिंह से हुआ था। वर्ष 2013 में दोनों के बीच तलाक की याचिका दायर की गई थी, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया था।

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साथ ही, तलाक की कार्यवाही के दौरान महिला ने यह भी स्वीकार किया था कि गुरमीत सिंह से पहले उसका विवाह लखविंदर सिंह से हुआ था। इन दोनों विवाहों का विधिक रूप से तलाक नहीं हुआ था।

याची का तर्क था कि चूंकि शिकायतकर्ता का पूर्व विवाह विधिक रूप से समाप्त नहीं हुआ था, इसलिए वह उसकी वैध पत्नी नहीं मानी जा सकती। ऐसे में धारा 498-ए के तहत ‘पति’ के रूप में उस पर कार्रवाई नहीं की जा सकती।

हाईकोर्ट का निर्णय

जस्टिस शालिनी नागपाल की एकल पीठ ने अपने फैसले में कहा कि IPC की धारा 498-ए पति और उसके रिश्तेदारों द्वारा क्रूरता के मामलों में लागू होती है। हालांकि, धारा में ‘पति’ की परिभाषा स्पष्ट रूप से नहीं दी गई है, लेकिन सामान्य विधिक व्याख्या के अनुसार यह शब्द हिंदू विवाह अधिनियम के तहत विधिक रूप से विवाहित पति को संदर्भित करता है।

कोर्ट ने कहा कि यदि पति या पत्नी बिना वैध तलाक लिए किसी अन्य से विवाह करते हैं, तो ऐसा विवाह कानून की दृष्टि में वैध नहीं माना जाएगा। ऐसी स्थिति में कथित दूसरा जीवनसाथी, विधिक अर्थों में ‘पति’ या ‘पत्नी’ नहीं माना जा सकता।

इन्हीं तथ्यों के आधार पर हाईकोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए कथित पति के खिलाफ जारी समन आदेश को रद्द कर दिया।


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