सुप्रीम कोर्ट ने यूपी बार काउंसिल चुनाव की समयसीमा 2 फरवरी 2026 तक बढ़ाई, लखनऊ में अव्यवस्था के चलते मतदान रद्द

सुप्रीम कोर्ट ने लखनऊ हाईकोर्ट परिसर में अव्यवस्था और सुरक्षा चिंताओं के कारण बाधित हुए उत्तर प्रदेश बार काउंसिल चुनावों की अंतिम तिथि 31 जनवरी से बढ़ाकर 2 फरवरी 2026 कर दी है।

सुप्रीम कोर्ट ने यूपी बार काउंसिल चुनाव की समयसीमा 2 फरवरी 2026 तक बढ़ाई, लखनऊ में अव्यवस्था के चलते मतदान रद्द

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को उत्तर प्रदेश बार काउंसिल के चुनाव संपन्न कराने की अंतिम तिथि 2 फरवरी 2026 तक बढ़ा दी। यह आदेश लखनऊ हाईकोर्ट परिसर में हुए मतदान के दौरान उत्पन्न गंभीर अव्यवस्था, सुरक्षा संकट और प्रशासनिक चूक के मद्देनज़र पारित किया गया।

गौरतलब है कि बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश के चुनाव हाई-पावर्ड इलेक्शन कमेटी की निगरानी में चरणबद्ध तरीके से कराए जा रहे हैं। यह प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के उस ऐतिहासिक निर्देश के अनुपालन में चल रही है, जिसमें देशभर के सभी राज्य बार काउंसिल चुनाव 31 जनवरी 2026 तक पूर्ण करने का आदेश दिया गया था, ताकि विधि समुदाय में लोकतांत्रिक जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके।

लखनऊ चरण में भारी अव्यवस्था

यूपी बार काउंसिल चुनाव का तीसरा चरण 27 और 28 जनवरी को 18 जिलों—जिसमें लखनऊ, कानपुर और मेरठ शामिल हैं—में निर्धारित था। लखनऊ में मतदान स्थल लखनऊ हाईकोर्ट परिसर रखा गया था।

27 जनवरी को मतदान शुरू होते ही स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई। अनुमानतः 25,000 से अधिक अधिवक्ता मतदान केंद्र पर पहुंच गए, जिससे व्यवस्थाएं चरमरा गईं। कई प्रत्याशी अधिवक्ताओं ने गंभीर कुप्रबंधन के आरोप लगाए।

दोपहर बाद हालात और बिगड़ गए जब कथित तौर पर मतपत्र मतदान केंद्र के बाहर पाए गए। इसके बाद बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शन शुरू हो गया, नारेबाजी हुई और मतदान क्षेत्र की घेराबंदी टूट गई। शाम करीब 4 बजे स्थिति इतनी बिगड़ चुकी थी कि सुरक्षा बनाए रखना असंभव हो गया।

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मतदान रद्द, चुनाव स्थगित

इन परिस्थितियों में रिटर्निंग ऑफिसर जस्टिस (सेवानिवृत्त) ए.के. त्रिपाठी और ऑब्ज़र्वर जस्टिस (सेवानिवृत्त) सुरेंद्र सिंह ने 27 जनवरी को डाले गए सभी मतों को रद्द करते हुए आगे के मतदान को स्थगित करने का आदेश जारी किया। आदेश में हाईकोर्ट परिसर की गरिमा को खतरा और अधिवक्ताओं के “अनियंत्रित व्यवहार” को प्रमुख कारण बताया गया।

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई

मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश (CJI) की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष हुई। चुनाव प्राधिकरण की ओर से पेश अधिवक्ता ने कोर्ट को लखनऊ की जमीनी हकीकत से अवगत कराते हुए कहा कि—

“लखनऊ में चुनाव हाईकोर्ट परिसर में कराया गया था, लेकिन सुरक्षा कारणों से इसे रद्द करना पड़ा। इसलिए प्रयागराज में शेष प्रक्रिया पूरी करने के लिए हमें 2–4 दिन का अतिरिक्त समय चाहिए।”

अधिवक्ता ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रयागराज में पुनः व्यवस्थाएं करने और लॉजिस्टिक्स को व्यवस्थित करने में समय लगेगा।

2 फरवरी तक चुनाव पूरे करने का निर्देश

स्थितियों को समझते हुए और निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए, CJI की पीठ ने समय विस्तार की अनुमति दे दी।

कोर्ट ने स्पष्ट आदेश दिया कि उत्तर प्रदेश बार काउंसिल के चुनाव 2 फरवरी 2026 तक हर हाल में पूरे किए जाएं।

यह विस्तार बार काउंसिल को मतदान की नई तारीखें अधिसूचित करने और शेष योग्य अधिवक्ताओं के लिए सुरक्षित एवं सुव्यवस्थित तरीके से मतदान संपन्न कराने का सीमित अवसर प्रदान करता है।


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