इंदौर के भगीरथपुरा जल प्रदूषण मामले में मौतों के आंकड़ों पर सवाल उठाते हुए मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की डेथ ऑडिट रिपोर्ट पर असंतोष जताया। कोर्ट ने पूर्व न्यायाधीश जस्टिस सुशील कुमार गुप्ता को एक-सदस्यीय जांच आयोग नियुक्त किया है।
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर पीठ ने भगीरथपुरा क्षेत्र में कथित जल प्रदूषण से हुई मौतों को लेकर राज्य सरकार की डेथ ऑडिट रिपोर्ट पर गंभीर सवाल उठाए हैं और मामले की निष्पक्ष जांच के लिए पूर्व न्यायाधीश को एक-सदस्यीय जांच आयोग नियुक्त किया है।
इंदौर जल प्रदूषण मामला: ‘वर्बल ऑटोप्सी क्या है?’—मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से पूछे सवाल, पूर्व जज की एक-सदस्यीय आयोग से जांच के आदेश
मंगलवार को संबंधित याचिकाओं की सुनवाई करते हुए जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की खंडपीठ ने निर्देश दिया कि आयोग चार सप्ताह के भीतर अंतरिम रिपोर्ट दाखिल करेगा।
राज्य सरकार की रिपोर्ट पर कोर्ट का असंतोष
राज्य सरकार ने अदालत के समक्ष एक डेथ ऑडिट एवं एनालिटिकल रिपोर्ट पेश की, जिसमें कहा गया कि:
- कुल 23 मौतों की रिपोर्ट प्राप्त हुई
- इनमें से 16 मौतें जल प्रदूषण (महामारी) से हुईं
- शेष मामलों में मौत का कारण “अस्पष्ट (inconclusive)” बताया गया
हालांकि, कोर्ट ने रिपोर्ट में दर्ज टिप्पणियों पर गंभीर आपत्ति जताई। आदेश में कहा गया:
“जो टिप्पणियां अस्पष्ट मृत्यु संभावनाओं के लिए तालिका में दर्ज हैं, वही टिप्पणियां उन मामलों में भी हैं जिन्हें निर्णायक रूप से जल प्रदूषण से जोड़ा गया है।”
‘वर्बल ऑटोप्सी’ पर सवाल
कोर्ट ने यह भी नोट किया कि रिपोर्ट का आधार CMHO और RJD हेल्थ कार्यालयों से प्राप्त जानकारी, केस शीट्स और तथाकथित ‘वर्बल ऑटोप्सी’ बताया गया है।
इस पर पीठ ने कड़ा सवाल उठाते हुए कहा:
“हमने राज्य से पूछा कि ‘वर्बल ऑटोप्सी’ क्या होती है, लेकिन वे यह तक स्पष्ट नहीं कर सके कि यह क्या है। न ही कोई ठोस सामग्री हमारे सामने रखी गई।”
मौतों की संख्या पर विरोधाभास
कोर्ट ने इस तथ्य पर भी चिंता जताई कि:
- याचिकाकर्ताओं और मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार अब तक लगभग 30 मौतें हो चुकी हैं
- जबकि सरकारी रिपोर्ट में बिना किसी ठोस रिकॉर्ड के केवल 16 मौतें दर्शाई गई हैं
पीठ ने कहा कि यह मामला गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट से जुड़ा है, जो बच्चों और बुजुर्गों सहित बड़े वर्ग को प्रभावित कर रहा है।
स्वतंत्र जांच की आवश्यकता
कोर्ट ने कहा कि आरोपों की गंभीरता और तथ्यों की विश्वसनीय जांच के लिए स्वतंत्र और निष्पक्ष तथ्य-संग्रह (fact-finding) अनिवार्य है।
इस आधार पर अदालत ने आदेश दिया:
“हम जस्टिस सुशील कुमार गुप्ता, पूर्व न्यायाधीश, मध्यप्रदेश हाईकोर्ट, को इंदौर के भगीरथपुरा क्षेत्र में जल प्रदूषण और उसके अन्य क्षेत्रों पर प्रभाव की जांच के लिए एक-सदस्यीय आयोग नियुक्त करते हैं।”
चार सप्ताह में अंतरिम रिपोर्ट, 5 मार्च को अगली सुनवाई
कोर्ट ने निर्देश दिया कि:
- जांच आयोग चार सप्ताह में अंतरिम रिपोर्ट दाखिल करेगा
- मामले की अगली सुनवाई 5 मार्च 2026 को होगी
तत्काल राहत के निर्देश
इसके अतिरिक्त, हाईकोर्ट ने प्रशासन को यह भी आदेश दिया कि:
- प्रभावित क्षेत्रों में प्रतिदिन जल गुणवत्ता परीक्षण किया जाए
- स्थानीय निवासियों के लिए मेडिकल कैंप आयोजित किए जाएं
यह मामला अब केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि राज्य की सार्वजनिक स्वास्थ्य जवाबदेही की भी परीक्षा बन गया है।
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