गैर-मान्यता के आधार पर मदरसा बंद करने का कोई अधिकार नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि उत्तर प्रदेश मदरसा विनियमन, 2016 में गैर-मान्यता के आधार पर मदरसा बंद करने का कोई प्रावधान नहीं है। जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी द्वारा मदरसा सील करने का आदेश रद्द, 24 घंटे में सील खोलने के निर्देश।


गैर-मान्यता के आधार पर मदरसा बंद करने का कोई अधिकार नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि किसी मदरसे को केवल इस आधार पर बंद नहीं किया जा सकता कि वह मान्यता प्राप्त नहीं है, क्योंकि उत्तर प्रदेश गैर-सरकारी अरबी एवं फारसी मदरसा मान्यता, प्रशासन एवं सेवा विनियमन, 2016 में ऐसा कोई प्रावधान मौजूद नहीं है।

यह निर्णय न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी की एकलपीठ ने Madarsa Ahle Sunnat Imam Ahmad Raza v. State of UP मामले में पारित किया, जिसमें जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी द्वारा पारित उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसके तहत मदरसे को बिना मान्यता के संचालन के आधार पर बंद (सील) कर दिया गया था।


याची का पक्ष

मदरसे की ओर से दलील दी गई कि—

  • मदरसा किसी भी प्रकार की सरकारी अनुदान (grant) की मांग नहीं कर रहा है।
  • विनियमन 13 के तहत मान्यता न होना, मदरसे को बंद करने का आधार नहीं बनता।
  • गैर-मान्यता का परिणाम केवल इतना है कि मदरसा सरकारी लाभों का दावा नहीं कर सकता, न कि उसका संचालन रोका जाए।

राज्य सरकार की दलील

राज्य की ओर से कहा गया कि—

  • बिना मान्यता के मदरसा चलाने से व्यावहारिक और कानूनी जटिलताएं उत्पन्न हो सकती हैं।
  • ऐसे मदरसे से शिक्षा प्राप्त करने वाले छात्र भविष्य में अपनी योग्यता के आधार पर किसी भी प्रकार का लाभ दावा नहीं कर सकेंगे।
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कोर्ट का विश्लेषण

हाईकोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा कि—

  • राज्य यह तथ्य विवादित नहीं कर सका कि विनियमन, 2016 में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जो गैर-मान्यता के आधार पर मदरसे के संचालन पर रोक लगाने की अनुमति देता हो।
  • प्रशासनिक अधिकारी ऐसे अधिकार का प्रयोग नहीं कर सकते, जो कानून द्वारा उन्हें प्रदान ही नहीं किया गया है।

अदालत का निर्णय

कोर्ट ने:

  • जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी द्वारा पारित मदरसा बंद करने का आदेश रद्द कर दिया।
  • मदरसे पर लगाई गई सील 24 घंटे के भीतर खोलने का निर्देश दिया।

हालांकि, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट सीमाएं तय कीं—

महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण

  • जब तक मदरसा मान्यता प्राप्त नहीं करता, वह किसी भी सरकारी अनुदान का दावा नहीं कर सकता।
  • मदरसा शिक्षा बोर्ड ऐसे मदरसे के छात्रों को अपनी परीक्षाओं में बैठने की अनुमति देने के लिए बाध्य नहीं होगा।
  • छात्रों को इस मदरसे से प्राप्त योग्यता के आधार पर राज्य सरकार से संबंधित किसी भी लाभ का अधिकार प्राप्त नहीं होगा।

निष्कर्ष

हाईकोर्ट ने संतुलित दृष्टिकोण अपनाते हुए यह स्पष्ट किया कि गैर-मान्यता प्रशासनिक नियंत्रण का आधार हो सकती है, लेकिन बंदी (closure) का नहीं, जब तक कानून में इसका स्पष्ट प्रावधान न हो।


मामला: Madarsa Ahle Sunnat Imam Ahmad Raza v. State of UP
मामला संख्या: WRIT C No. 307 of 2026


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