सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ड्राइविंग लाइसेंस की अवधि समाप्त होने के बाद नवीनीकरण पिछली तारीख से प्रभावी नहीं माना जाएगा। लाइसेंस में किसी भी अवधि का अंतराल “लगातार” लाइसेंस की शर्त को तोड़ देता है।
लाइसेंस समाप्त होने के बाद नवीनीकरण से निरंतरता नहीं बनती: सुप्रीम कोर्ट
ड्राइविंग लाइसेंस में जरा-सा भी गैप भर्ती के लिए घातक: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में यह साफ कर दिया है कि ड्राइविंग लाइसेंस की अवधि समाप्त होने के बाद किया गया नवीनीकरण पिछली तारीख से प्रभावी नहीं माना जा सकता, भले ही नवीनीकरण वैधानिक समय-सीमा के भीतर ही क्यों न किया गया हो। अदालत ने कहा कि “लगातार” वैध ड्राइविंग लाइसेंस की शर्त का अर्थ है बिना किसी भी प्रकार के अंतराल के वैध लाइसेंस का होना।
हाईकोर्ट का फैसला पलटा
जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस एस. वी. एन. भट्टी की खंडपीठ ने तेलंगाना उच्च न्यायालय के उस फैसले को पलट दिया, जिसमें ड्राइविंग लाइसेंस में अंतराल के बावजूद नवीनीकरण के आधार पर अभ्यर्थियों को चयन प्रक्रिया में शामिल होने की अनुमति दी गई थी।
सुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना राज्य स्तरीय पुलिस भर्ती बोर्ड (TSLPRB) की पात्रता शर्तों की व्याख्या को सही ठहराया।
क्या था मामला?
तेलंगाना राज्य स्तरीय पुलिस भर्ती बोर्ड ने अप्रैल–मई 2022 में पुलिस कांस्टेबल (ड्राइवर) और फायर सर्विसेज में ड्राइवर ऑपरेटर के 325 पदों के लिए भर्ती अधिसूचना जारी की थी। एक अनिवार्य पात्रता शर्त यह थी कि—
अधिसूचना की तिथि तक अभ्यर्थी के पास कम से कम दो वर्षों से “लगातार” वैध एलएमवी/एचएमवी ड्राइविंग लाइसेंस होना चाहिए।
कुछ अभ्यर्थियों के लाइसेंस इस दो वर्षीय अवधि के दौरान समाप्त हो गए थे, जिन्हें बाद में मोटर वाहन अधिनियम के तहत अनुमत अवधि के भीतर नवीनीकृत कर लिया गया। उच्च न्यायालय ने यह मानते हुए उन्हें राहत दी थी कि नवीनीकरण समाप्ति की तारीख से प्रभावी माना जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट की सख्त व्याख्या
सुप्रीम कोर्ट ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि विधि की व्याख्या का मूल सिद्धांत उसके शब्दों का सामान्य और स्पष्ट अर्थ अपनाना है। कोर्ट ने मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 14 और मोटर वाहन (संशोधन) अधिनियम, 2019 पर विशेष जोर दिया।
अदालत ने कहा कि संशोधन के बाद—
- लाइसेंस की अवधि समाप्त होते ही वह तत्काल प्रभाव से अमान्य हो जाता है
- नवीनीकरण होने तक लाइसेंस धारक को वाहन चलाने की कोई कानूनी पात्रता नहीं रहती
- समाप्ति और नवीनीकरण के बीच का समय कानूनी अक्षमता की अवधि है
“लगातार” शब्द का अर्थ क्या?
पीठ ने स्पष्ट किया कि “लगातार” (continuous) का अर्थ है—
“बिना किसी रुकावट या व्यवधान के।”
जिस अवधि में अभ्यर्थी कानूनी रूप से वाहन चलाने के लिए अधिकृत नहीं था, वह अवधि निरंतरता में स्पष्ट विराम है। इसलिए, लाइसेंस की समाप्ति और उसके नवीनीकरण के बीच का कोई भी अंतराल, चाहे वह एक दिन का ही क्यों न हो, पात्रता की शर्त को तोड़ देता है।
ड्राइविंग सिर्फ कागजी योग्यता नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी महत्वपूर्ण टिप्पणी की कि—
“ड्राइविंग केवल कागजी योग्यता नहीं है, बल्कि इसमें व्यावहारिक अनुभव और निरंतर अभ्यास भी शामिल है।”
पुलिस और अग्निशमन सेवा जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में वाहन संचालन के लिए निरंतर अभ्यास और दक्षता अत्यंत आवश्यक है। लाइसेंस में अंतराल यह दर्शाता है कि अभ्यर्थी उस अवधि में वैधानिक रूप से वाहन चलाने के लिए अधिकृत नहीं था, जो ऐसे पदों के लिए अस्वीकार्य है।
भर्ती बोर्ड की अपील स्वीकार
इन सभी कारणों के आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना राज्य स्तरीय पुलिस भर्ती बोर्ड की अपील स्वीकार कर ली और यह घोषित किया कि—
- जिन अभ्यर्थियों के ड्राइविंग लाइसेंस में प्रासंगिक दो वर्षीय अवधि के दौरान कोई भी अंतराल रहा
- और जिन्हें बाद में लाइसेंस नवीनीकृत कराया गया
वे “लगातार वैध ड्राइविंग लाइसेंस” की शर्त पूरी नहीं करते और भर्ती के लिए अयोग्य हैं।
व्यापक प्रभाव
यह फैसला भविष्य की सभी सरकारी भर्तियों, विशेषकर ड्राइवर, पुलिस, फायर सर्विस और आपदा प्रबंधन सेवाओं में एक महत्वपूर्ण नज़ीर बनेगा। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट संदेश दिया है कि पात्रता शर्तों में ढील नहीं दी जा सकती, चाहे अंतराल कितना ही छोटा क्यों न हो।
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