INDIA ब्लॉक द्वारा जजों को डराने के लिए इम्पीचमेंट का इस्तेमाल खतरनाक, पूर्व जजों ने चेताया इमरजेंसी की याद दिलाने वाली स्थिति

📰 पूर्व न्यायाधीशों की कड़ी अपील: “जजों को डराने के लिए इम्पीचमेंट का इस्तेमाल खतरनाक—MPs इस कदम को तुरंत रोकें”

पूर्व सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट जजों ने मद्रास हाई कोर्ट के जस्टिस जी.आर. स्वामीनाथन के खिलाफ शुरू हुए इम्पीचमेंट प्रयास पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि यह न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर सीधा हमला है और संसद सदस्यों को इसे तुरंत रोकना चाहिए।


देश की न्यायपालिका पर बढ़ते दबाव और राजनीतिक हस्तक्षेप को लेकर एक अहम आवाज बुलंद हुई है। पूर्व सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के कई जजों ने मद्रास हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति जी.आर. स्वामीनाथन के खिलाफ चल रहे इम्पीचमेंट प्रयास को “न्यायिक स्वतंत्रता पर गंभीर हमला” बताते हुए सांसदों से इसे तत्काल रोकने की अपील की है।

अपने विस्तृत बयान में पूर्व न्यायाधीशों ने कहा कि—

“यह कदम न्यायाधीशों पर अनुचित दबाव डालने और उन्हें विशेष राजनीतिक या वैचारिक रुख अपनाने के लिए मजबूर करने की कोशिश लगता है।”

⚖️ इम्पीचमेंट के आधार ‘गंभीरता’ की कसौटी पर खरे नहीं:

पूर्व जजों ने स्पष्ट कहा कि भले ही MPs द्वारा लगाए गए आरोप मान भी लिए जाएँ, वे इम्पीचमेंट जैसी असाधारण संवैधानिक प्रक्रिया को शुरू करने लायक नहीं हैं। उन्होंने इसे न्यायिक मनोबल गिराने वाला और खतरनाक बताया।

🕰️ “इमरजेंसी” की याद दिलाने वाली स्थिति:

जजों ने चेताया कि ऐसी घटनाएँ नई नहीं हैं। इमरजेंसी काल में भी कुछ न्यायाधीशों को “लाइन में न आने” के कारण निशाना बनाया गया था। उन्होंने कहा—

“न्यायपालिका ने हमेशा स्वतंत्रता बनाए रखने के लिए संघर्ष किया है, और यह प्रयास उसी संघर्ष पर चोट है।”

🎯 यह सिर्फ एक जज का मामला नहीं—एक पैटर्न बनता जा रहा है:

पूर्व जजों ने इस बात पर जोर दिया कि हाल के वर्षों में कई न्यायाधीशों और पूर्व मुख्य न्यायाधीशों—
दीपक मिश्रा, रंजन गोगोई, एस.ए. बोबडे, डी.वाई. चंद्रचूड़
और वर्तमान CJI सुर्या कांत—को भी राजनीतिक विरोध का सामना करना पड़ा जब उनके निर्णय कुछ समूहों को पसंद नहीं आए।

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उन्होंने इसे “लोकतंत्र के लिए गंभीर चिंता का विषय” बताया।

🔥 इम्पीचमेंट—सुरक्षा का उपकरण, धमकी का नहीं:

जजों ने याद दिलाया कि इम्पीचमेंट का उद्देश्य न्यायपालिका को जवाबदेह और सुरक्षित रखना है, न कि राजनीतिक दबाव का हथियार बनाना।

“अगर यह प्रवृत्ति जारी रही तो आज एक जज निशाना बनेगा, कल पूरी संस्था कमजोर हो जाएगी।”

🗣️ सभी नागरिकों और MPs से अपील:

पूर्व जजों ने सभी राजनीतिक दलों, वकीलों, सिविल सोसायटी और आम नागरिकों से इस कदम के खिलाफ आवाज उठाने को कहा।

उन्होंने कहा—

“जज केवल संविधान और अपने शपथ के प्रति जवाबदेह हैं, न कि राजनीतिक धमकियों या जन-आक्रोश के प्रति।”

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