SC ने कहा कि लाइसेंसी द्वारा बकाया और नियमित लाइसेंस फीस जमा न करने पर, CPC (Bombay Amendment) के Order XV-A के तहत उसकी डिफ़ेंस स्ट्राइक ऑफ की जा सकती है

लाइसेंस फीस न चुकाने पर डिफ़ेंस हो सकता है स्ट्राइक ऑफ: सुप्रीम कोर्ट ने टेनेंसी विवाद में दी बड़ी स्पष्टता

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि लाइसेंसी द्वारा बकाया और नियमित लाइसेंस फीस जमा न करने पर, CPC (Bombay Amendment) के Order XV-A के तहत उसकी डिफ़ेंस स्ट्राइक ऑफ की जा सकती है। कोर्ट ने हाई कोर्ट द्वारा राहत देने से इनकार करते हुए स्पष्ट किया—लाइसेंस समाप्त होने के बाद परिसर न खाली करने वाला ‘gratuitous licensee’ डिफ़ेंस नहीं ले सकता।


सुप्रीम कोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला: लाइसेंस फीस न चुकाने पर डिफ़ेंस हो सकता है ख़त्म

टेनेंसी और लाइसेंस विवाद से जुड़े एक महत्वपूर्ण निर्णय में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि लाइसेंसी बकाया एवं नियमित लाइसेंस शुल्क जमा नहीं करता, तो उसका डिफ़ेंस CPC (Bombay Amendment) के Order XV-A के तहत स्ट्राइक ऑफ किया जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि लाइसेंस समाप्त होने के बाद बिना अधिकार परिसर पर कब्ज़ा बनाए रखना व्यक्ति को gratuitous licensee बना देता है, और इस स्थिति में वह तब तक डिफ़ेंस नहीं ले सकता जब तक बकाया लाइसेंस फीस जमा न की जाए।

Justice J.K. Maheshwari और Justice Vijay Bishnoi की खंडपीठ ने यह निर्णय दिया, जिसने बॉम्बे हाई कोर्ट के उस आदेश में हस्तक्षेप किया जिसमें नियमित लाइसेंस फीस और बकाया जमा करने के आदेश को हटाया गया था।


🔹 मामले की पृष्ठभूमि: 36 महीने का लाइसेंस, बाद में कब्ज़ा न छोड़ा

  • अपीलकर्ता लाइसेंसर और प्रतिवादी लाइसेंसी के बीच 36 महीनों का Leave & License Agreement हुआ था।
  • समझौते के अनुसार लाइसेंस शुल्क हर वर्ष 7% बढ़ना था।
  • अवधि समाप्त होने के बाद भी प्रतिवादी ने परिसर vacate नहीं किया।
  • इसके बाद लाइसेंसर ने Section 41, Maharashtra Rent Control Act, 1999 के तहत Suit दायर कर—
    • परिसर का कब्ज़ा,
    • बकाया ₹1,39,56,905,
    • एवं mesne profits
      की मांग की।
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लाइसेंसी ने दो वर्ष बाद खुद को tenant घोषित करने के लिए अलग Suit दाखिल किया।

ट्रायल कोर्ट ने Agreement के अनुसार प्रतिदिन ₹10,000 liquidated damages देने का निर्देश दिया। हाई कोर्ट ने injunction को बरकरार रखा, लेकिन liquidated damages को रद्द कर दिया। इसी आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई।


🔹 सुप्रीम कोर्ट की प्रमुख टिप्पणियाँ

1️⃣ लाइसेंस समाप्त होने के बाद फीस न देना—gratuitous licensee बनाता है

कोर्ट ने कहा:

“जब लाइसेंस अवधि समाप्त हो चुकी थी और लाइसेंस फीस नहीं चुकाई गई, तो लाइसेंसी gratuitous licensee बन गया और ऐसे व्यक्ति को तब तक डिफ़ेंस नहीं दिया जा सकता जब तक वह बकाया जमा न कर दे।”

2️⃣ Order XV-A का उद्देश्य—बकाया जमा न करने पर डिफ़ेंस स्ट्राइक ऑफ

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि:

  • ऐसे मामलों में अदालत को अपने विवेक का प्रयोग करते हुए
    बकाया और नियमित लाइसेंस फीस जमा करने के आदेश
    अनिवार्य रूप से देना चाहिए।
  • यदि लाइसेंसी आदेश का पालन नहीं करता, तो
    Rule 2 के तहत डिफ़ेंस स्ट्राइक ऑफ किया जा सकता है।

कोर्ट के अनुसार Order XV-A इसलिए लाया गया था कि eviction suits में—

  • arrears,
  • regular rent/license fee,
  • एवं future mesne profits

के भुगतान पर सख्त निगरानी रखी जा सके।


🔹 हाई कोर्ट का दृष्टिकोण त्रुटिपूर्ण

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाई कोर्ट को यह ध्यान रखना चाहिए था कि—

  • Agreement में प्रत्येक वर्ष 7% वृद्धि स्पष्ट थी,
  • भुगतान का पैटर्न विवादित नहीं था,
  • और लाइसेंसी ने लाइसेंस अवधि के बाद परिसर खाली नहीं किया।

इसलिए हाई कोर्ट का arrears और regular rent के निर्देश को हटाना गलत था।

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🔹 अंतिम आदेश: लाइसेंसी को दो महीने में फीस जमा करनी होगी

अपील को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए कोर्ट ने आदेश दिया—

  • ट्रायल कोर्ट का injunction आदेश बरकरार रहेगा,
  • लाइसेंसी को सभी बकाया और नियमित लाइसेंस फीस
    दो महीने में जमा करनी होगी,
  • पहले से जमा राशि को समायोजित कर भुगतान किया जाएगा।

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