वोडाफोन-आइडिया ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर वित्त वर्ष 2016-17 तक की अतिरिक्त AGR डिमांड्स को अनुचित और मनमाना बताते हुए रद्द करने की मांग की है। कंपनी ने DoT से AGR देनदारियों का पुनर्मूल्यांकन करने का निर्देश देने की अपील की है।
सुप्रीम कोर्ट में राहत की तलाश: वोडाफोन-आइडिया ने AGR डिमांड्स को लेकर दाखिल की याचिका
नई दिल्ली, 10 सितम्बर 2025 — दूरसंचार कंपनी वोडाफोन-आइडिया ने अतिरिक्त एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू (AGR) डिमांड्स से राहत पाने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया है। कंपनी ने कहा कि वित्त वर्ष 2016-17 तक की अवधि से जुड़ी AGR देनदारियां पहले ही शीर्ष अदालत के फैसले से निपटाई जा चुकी हैं और अब नई डिमांड्स उठाना अनुचित और मनमाना कदम है।
याचिका में क्या मांग की गई?
- अतिरिक्त AGR डिमांड्स को रद्द करने का निर्देश।
- दूरसंचार विभाग (DoT) को फरवरी 2020 में जारी ‘Deduction Verification Guidelines’ के आधार पर AGR देनदारियों का पुनर्मूल्यांकन और समायोजन करने का आदेश।
याचिका में कहा गया —
“DoT द्वारा अतिरिक्त डिमांड उठाना पूरी तरह अन्यायपूर्ण और मनमाना है, जबकि AGR देनदारियां पहले ही सुप्रीम कोर्ट के आदेश से तय हो चुकी थीं। DoT अतिरिक्त डिमांड्स उठाने को स्वतंत्र है, लेकिन कंपनी को गलतियों को सुधारने की अनुमति नहीं दी जा रही है।”
वोडाफोन-आइडिया का तर्क
- गणना में त्रुटियों के चलते कई प्रविष्टियों की डुप्लीकेशन हो गई है, यानी कुछ रकम बार-बार जोड़ दी गई।
- इससे कंपनी पर देनदारियां बढ़ाकर थोप दी गईं।
पृष्ठभूमि
- अक्टूबर 2019: सुप्रीम कोर्ट ने टेलीकॉम कंपनियों को बकाया AGR चुकाने का आदेश दिया।
- सितम्बर 2020: अदालत ने कंपनियों को बकाया AGR चुकाने के लिए 10 साल की किस्त अवधि दी, हर साल 10% भुगतान अनिवार्य किया।
- मार्च 31, 2021: पहली किस्त जमा करने की समयसीमा तय हुई।
- जुलाई 2021: सुप्रीम कोर्ट ने एयरटेल और वोडाफोन-आइडिया सहित प्रमुख टेलीकॉम कंपनियों की वह याचिका खारिज कर दी, जिसमें उन्होंने AGR कैलकुलेशन में त्रुटियों को सुधारने की मांग की थी।
मौजूदा स्थिति
अब वोडाफोन-आइडिया ने फिर से राहत की मांग की है और DoT द्वारा उठाए गए अतिरिक्त डिमांड्स को चुनौती दी है। यह मामला दूरसंचार सेक्टर पर पहले से ही चल रहे वित्तीय दबाव और कंपनियों की संघर्षपूर्ण स्थिति को और उजागर करता है।
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