सबरीमला घी घोटाला: 33 आरोपी नामजद, केरल हाईकोर्ट ने 45 दिन में जांच पूरी करने का आदेश

केरल हाईकोर्ट ने सबरीमला ‘आदिया सिष्टम घी’ घोटाले में 33 लोगों को आरोपी बनाए जाने की जानकारी पर सख्त रुख अपनाया। ट्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड की लेखा प्रणाली पर सवाल उठाते हुए 45 दिन में जांच पूरी करने और पारदर्शी वित्तीय ढांचा लागू करने का निर्देश दिया।


Kerala High Court में गुरुवार को सबरीमला ‘घी घोटाले’ मामले की सुनवाई के दौरान विजिलेंस टीम ने बताया कि कुल 33 व्यक्तियों को आरोपी बनाया गया है। इनमें तीन मंदिर विशेष अधिकारी और 30 काउंटर कर्मचारी शामिल हैं। मामला ‘आदिया सिष्टम घी’ की बिक्री से लगभग 21.39 लाख रुपये के कथित गबन से जुड़ा है।

सुनवाई के दौरान अदालत ने Travancore Devaswom Board (TDB) की निगरानी प्रणाली पर गंभीर आपत्ति जताई। पीठ ने पाया कि घी के पैकेटों के वितरण का रिकॉर्ड किसी औपचारिक लेखा प्रणाली के बजाय अनौपचारिक नोटबुक में रखा जा रहा था, जिनमें कई जगह कटिंग और ओवरराइटिंग पाई गई।

न्यायमूर्ति V Raja Vijayaraghavan और न्यायमूर्ति K V Jayakumar की खंडपीठ ने इसे वित्तीय पारदर्शिता के मानकों के विपरीत बताया। अदालत ने विजिलेंस टीम को 45 दिनों के भीतर जांच पूरी करने का निर्देश दिया।

साथ ही, देवस्वोम बोर्ड को निर्देशित किया गया कि वह मंदिरों में प्राप्त सभी चढ़ावे और प्रसाद बिक्री के लिए पूर्णत: पारदर्शी और जवाबदेह वित्तीय ढांचा लागू करे। इस संबंध में विस्तृत कार्ययोजना 27 फरवरी तक अदालत में प्रस्तुत करने को कहा गया है।

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क्या है ‘आदिया सिष्टम घी’ विवाद?

सबरीमला मंदिर में ‘आदिया सिष्टम घी’ श्रद्धालुओं को वितरित किया जाता है। आरोप है कि इसकी बिक्री से प्राप्त राशि का सही हिसाब-किताब नहीं रखा गया और धन का गबन हुआ। विजिलेंस जांच में कथित अनियमितताओं के आधार पर 33 लोगों को आरोपी बनाया गया है।

अदालत ने स्पष्ट किया कि धार्मिक संस्थानों में आस्था के साथ-साथ वित्तीय अनुशासन और पारदर्शिता भी उतनी ही आवश्यक है।


समानांतर मामला: सबरीमला गोल्ड थेफ्ट केस में तंत्री को जमानत

इसी बीच, Kollam Vigilance Court ने बुधवार को सबरीमला गोल्ड थेफ्ट केस में आरोपी तंत्री कंदरारु राजीवरु को जमानत दे दी। उन्हें पूजापुरा सेंट्रल जेल से 41 दिनों की न्यायिक हिरासत के बाद रिहा किया गया।

राजीवरु, जो Sabarimala Sree Dharma Sastha Temple के मुख्य पुजारी (तंत्री) हैं, को 9 जनवरी को क्राइम ब्रांच ने गिरफ्तार किया था। उन पर मंदिर के द्वारपाल प्रतिमाओं और ‘कट्टिलप्पल्ली’ (द्वार फ्रेम) से स्वर्ण-मढ़ित तांबे की प्लेटों के कथित दुरुपयोग का आरोप है।

उनके खिलाफ आपराधिक विश्वासघात, जालसाजी, आपराधिक साजिश और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्रावधान लगाए गए हैं। गिरफ्तारी Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita की धारा 48 के तहत जारी नोटिस के आधार पर की गई थी।


व्यापक असर

सबरीमला से जुड़े ये दोनों मामले—घी बिक्री में कथित गबन और स्वर्ण आभूषणों में अनियमितता—केरल में मंदिर प्रशासन की पारदर्शिता और जवाबदेही पर बड़े सवाल खड़े कर रहे हैं।

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हाईकोर्ट का सख्त रुख संकेत देता है कि धार्मिक संस्थानों में वित्तीय प्रबंधन को लेकर अब न्यायिक निगरानी और सख्त हो सकती है। 45 दिन की समयसीमा ने जांच एजेंसियों पर दबाव बढ़ा दिया है।

मामले की अगली सुनवाई में देवस्वोम बोर्ड की कार्ययोजना और विजिलेंस की प्रगति रिपोर्ट पर अदालत की नजर रहेगी।


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