संजय भंडारी संपत्ति जब्ती पर आदेश 28 फरवरी को
राउज एवेन्यू कोर्ट ने ED की याचिका पर संजय भंडारी की देश-विदेश स्थित संपत्तियों की जब्ती के आदेश को 28 फरवरी तक टाल दिया। भंडारी को फ्यूजिटिव इकोनॉमिक ऑफेंडर घोषित किया जा चुका है; मामला दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौतीाधीन।
नई दिल्ली: Rouse Avenue Court ने सोमवार को प्रवर्तन निदेशालय (ED) की उस याचिका पर आदेश सुरक्षित रखने के बाद फैसला 28 फरवरी तक टाल दिया, जिसमें कथित हथियार कारोबारी Sanjay Bhandari की संपत्तियों की जब्ती (confiscation) की मांग की गई है। विशेष न्यायाधीश संजय जिंदल ने कहा कि आदेश तैयार न होने के कारण उसे स्थगित किया जा रहा है।
ED ने दलील दी है कि भंडारी को पिछले वर्ष भगोड़ा आर्थिक अपराधी (Fugitive Economic Offender) घोषित किया जा चुका है, इसलिए फ्यूजिटिव इकोनॉमिक ऑफेंडर्स एक्ट के तहत उनकी देश-विदेश स्थित संपत्तियां जब्त की जानी चाहिए। इससे पहले उन्हें उद्घोषित अपराधी (proclaimed offender) भी घोषित किया गया था।
31 जनवरी को अदालत ने ED की याचिका पर आदेश सुरक्षित रखा था। एजेंसी की ओर से विशेष लोक अभियोजक नवीन कुमार मट्टा और मोहम्मद फैज़ान पेश हुए। विशेष वकील जोहेब हुसैन ने अदालत को बताया कि अब तक संबंधित संपत्तियों पर किसी ने आपत्ति नहीं जताई है, इसलिए वे जब्ती योग्य हैं।
देश-विदेश की संपत्तियां दांव पर
ED के अनुसार, प्रस्तावित सूची में भारत, दुबई और ब्रिटेन स्थित संपत्तियां शामिल हैं। इनमें नोएडा और गुरुग्राम में कथित बेनामी संपत्तियां, वसंत विहार और शाहपुर जाट में अचल संपत्ति, पंचशील शॉपिंग कॉम्प्लेक्स में प्रॉपर्टी, बैंक खातों की श्रृंखला, आभूषण और नकदी भी शामिल हैं। एजेंसी ने कहा कि अदालत के आदेश के बाद विदेशों में स्थित संपत्तियों की जब्ती के लिए भी औपचारिक पत्र भेजे जाएंगे।
ED ने यह भी तर्क दिया कि जब्ती की कार्यवाही का उद्देश्य उन व्यक्तियों को हतोत्साहित करना है जो अभियोजन से बचने के लिए देश छोड़ देते हैं।
फ्यूजिटिव घोषित करने का आदेश और चुनौती
5 जुलाई 2025 को दिल्ली की विशेष अदालत ने ED की अर्जी पर भंडारी को फ्यूजिटिव इकोनॉमिक ऑफेंडर घोषित किया था। यह आदेश अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश संजीव अग्रवाल ने पारित किया था। एजेंसी का आरोप है कि भंडारी ने आयकर मामले में 100 करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी अघोषित संपत्तियां रखीं और जानबूझकर भारतीय न्यायिक प्रक्रिया से बचते रहे।
हालांकि, फ्यूजिटिव घोषित करने का आदेश फिलहाल Delhi High Court में चुनौतीाधीन है। इससे पहले अदालत ने 12 जुलाई को भंडारी को वैधानिक उपाय अपनाने के लिए समय भी दिया था।
प्रत्यर्पण विवाद
भंडारी यूके में रह रहे हैं। उनके प्रत्यर्पण को लेकर ब्रिटेन की अदालतों में लंबी कानूनी लड़ाई चली। High Court of Justice ने मानवाधिकार आधारों पर उनका प्रत्यर्पण रोक दिया था, यह कहते हुए कि भारतीय हिरासत, विशेषकर तिहाड़ जेल में, उनकी सुरक्षा को खतरा हो सकता है। ब्रिटेन के सर्वोच्च न्यायालय में भारतीय सरकार की अपील भी खारिज हो चुकी है।
भंडारी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता Maninder Singh ने तर्क दिया कि उनका यूके में निवास वैध है और ED की अर्जी अधिकार-क्षेत्र से परे व अस्पष्ट है। उनका यह भी कहना है कि कथित अपराध की धनराशि 100 करोड़ रुपये से कम है, जैसा कि आयकर विभाग ने 2020 में प्रस्तुत किया था।
आगे क्या?
अब 28 फरवरी को राउज एवेन्यू कोर्ट यह तय करेगी कि क्या फ्यूजिटिव इकोनॉमिक ऑफेंडर्स एक्ट के तहत भंडारी की सूचीबद्ध संपत्तियों को जब्त करने का आदेश दिया जाए। यदि जब्ती का आदेश पारित होता है, तो यह देश-विदेश में फैली संपत्तियों पर व्यापक प्रभाव डालेगा और सीमा-पार आर्थिक अपराधों के मामलों में ED की कार्रवाई को मजबूती देगा।
यह मामला न केवल आर्थिक अपराध कानून के प्रवर्तन की परीक्षा है, बल्कि प्रत्यर्पण, मानवाधिकार और संपत्ति अधिकारों के जटिल अंतरराष्ट्रीय आयामों को भी उजागर करता है।
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