पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने कथित अवैध गोमांस रखने के आरोप में 62 वर्षीय व्यक्ति की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने ‘भैंस का मांस समझकर खरीदे जाने’ की दलील को कानून से बचने की चतुर चाल बताया।
⚖️ कथित अवैध बीफ रखने के मामले में 62 वर्षीय आरोपी को अग्रिम जमानत से इनकार, पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट सख्त
पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने कथित रूप से अवैध गोमांस (बीफ) रखने और उसकी सप्लाई के आरोपों का सामना कर रहे एक 62 वर्षीय व्यक्ति को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया है। न्यायमूर्ति आराधना साहनी की पीठ ने आरोपी की उस दलील को सिरे से खारिज कर दिया, जिसमें उसने दावा किया था कि उसे मांस विक्रेताओं द्वारा यह कहकर गुमराह किया गया कि वह भैंस का मांस है।
कोर्ट ने इस दलील को कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए गढ़ा गया बाद का बहाना करार दिया।
📌 पूरा मामला क्या है?
मामले की शुरुआत एक गुप्त सूचना से हुई, जिसके आधार पर एक गौरक्षक समूह के सदस्य ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि आरोपी अपने स्कूटर के जरिए बीफ की सप्लाई कर रहा है।
इस सूचना के आधार पर शिकायतकर्ता और स्थानीय लोगों ने आरोपी को रोका। मौके पर पहुंची पुलिस ने स्कूटर की तलाशी ली, जिसमें से करीब 50 किलोग्राम मांस बरामद हुआ। पूछताछ के दौरान आरोपी ने दावा किया कि यह भैंस के बछड़े का मांस है, जिसे उसने पंजाब और उत्तर प्रदेश के विक्रेताओं से खरीदा है। अपने बचाव में उसने भैंस के मांस से संबंधित दो बिल भी पेश किए।
🧪 फॉरेंसिक रिपोर्ट से बदली जांच की दिशा
पुलिस ने मांस के नमूनों को जांच के लिए राष्ट्रीय मांस अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद भेजा।
फॉरेंसिक विशेषज्ञों की रिपोर्ट में पुष्टि हुई कि बरामद मांस बैल या सांड का है।
इस रिपोर्ट के बाद पुलिस ने मामले को गंभीर मानते हुए आरोपों में वृद्धि कर दी।
⚖️ आरोपी पर दर्ज धाराएं
आरोपी के खिलाफ निम्नलिखित कानूनी प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया है—
- भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 299
(जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण कृत्य, जिससे किसी वर्ग की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचे) - पंजाब गोहत्या निषेध अधिनियम, 1955 की धारा 8
(गोहत्या और उससे संबंधित अपराधों पर दंड का प्रावधान)
🧑⚖️ बचाव पक्ष की दलीलें
आरोपी की ओर से अधिवक्ता जसबीर सिंह डडवाल ने तर्क दिया कि—
- आरोपी 62 वर्ष का वरिष्ठ नागरिक है
- उसे झूठे मामले में फंसाया गया है
- उसे ईमानदारी से यह विश्वास था कि मांस भैंस का है
- विक्रेताओं द्वारा उसे गुमराह किया गया
- चूंकि मांस पहले ही बरामद हो चुका है, इसलिए हिरासत में पूछताछ की कोई आवश्यकता नहीं है
👨⚖️ अभियोजन पक्ष का जवाब
अतिरिक्त लोक अभियोजक राहुल अरोड़ा ने दलीलों का विरोध करते हुए कहा—
- यह मानना असंभव है कि दो अलग-अलग राज्यों के विक्रेताओं ने आरोपी को एक ही तरह से गुमराह किया
- यह दलील केवल खुद को बचाने का अंतिम प्रयास है
गौरक्षक पक्ष के वकीलों ने भी दलील दी कि—
- हिंदू धर्म में गाय का विशेष धार्मिक महत्व है
- आरोपी के कृत्य से धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं
🏛️ हाईकोर्ट की अहम टिप्पणियाँ
न्यायमूर्ति आराधना साहनी ने 19 जनवरी को दिए अपने आदेश में कहा—
“याचिकाकर्ता द्वारा यह कहना कि उसे विक्रेताओं द्वारा गुमराह किया गया था, एक चतुर चाल और बाद में सोचा गया विचार है, जिस पर कोई ध्यान देने की आवश्यकता नहीं है।”
कोर्ट ने यह भी कहा कि—
- आरोपी की हिरासत में पूछताछ आवश्यक है
- यह पता लगाया जाना जरूरी है कि इस कथित अवैध गतिविधि में और कौन शामिल है
- गायों का वध कहां किया गया
- मांस की सप्लाई और बिक्री का पूरा नेटवर्क क्या है
- खरीदार कौन हैं
कोर्ट ने निकिता जगन्नाथ शेट्टी बनाम महाराष्ट्र राज्य मामले का हवाला देते हुए दोहराया कि अग्रिम जमानत एक असाधारण राहत है, जिसे सामान्य नियम के रूप में नहीं दिया जा सकता।
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