किरायेदारी या कब्जे के विवाद के कारण परिसर की बिजली आपूर्ति अनिश्चितकाल तक रोकी नहीं जा सकती-हाईकोर्ट

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कोचिंग सेंटर की बिजली काटना गलत: हाईकोर्ट ने 7 दिन में बिजली बहाल करने का दिया आदेश

हाईकोर्ट ने कोचिंग सेंटर की बिजली बहाल करने का आदेश देते हुए कहा कि किराया विवाद के बावजूद परिसर में बिजली आपूर्ति रोकी नहीं जा सकती। अदालत ने 7 दिन में सप्लाई बहाल करने और उपभोक्ता को बिजली बिल चुकाने का निर्देश दिया।


Delhi High Court ने एक महत्वपूर्ण आदेश में कहा है कि किसी किरायेदारी या कब्जे के विवाद के कारण परिसर की बिजली आपूर्ति अनिश्चितकाल तक रोकी नहीं जा सकती, खासकर जब उससे व्यक्ति की आजीविका प्रभावित हो रही हो। अदालत ने संबंधित परिसर में सात दिनों के भीतर बिजली आपूर्ति बहाल करने का निर्देश दिया।

Justice Rajneesh Kumar Gupta की एकल पीठ ने यह आदेश उस याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया, जिसे संविधान के Article 227 of the Constitution of India के तहत दायर किया गया था।

ट्रायल कोर्ट के आदेश को चुनौती

याचिकाकर्ता ने 26 अप्रैल 2025 को पारित ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उसके कोचिंग सेंटर में बिजली आपूर्ति बहाल करने की मांग वाली अर्जी खारिज कर दी गई थी।

याचिकाकर्ता का कहना था कि वह संबंधित परिसर में कोचिंग सेंटर चला रहा है और 17 सितंबर 2024 से वहां की बिजली आपूर्ति काट दी गई है। इससे न केवल उसकी कक्षाएं प्रभावित हुईं बल्कि उसकी आजीविका पर भी गंभीर असर पड़ा

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मकान मालिक और किरायेदार के बीच विवाद

मामले में प्रतिवादी ने यह तर्क दिया कि याचिकाकर्ता के साथ कोई औपचारिक किरायानामा (rent agreement) नहीं किया गया था, जिससे पुलिस सत्यापन की प्रक्रिया पूरी करने में कठिनाई आ रही थी।

प्रतिवादी ने यह भी आरोप लगाया कि याचिकाकर्ता ने सितंबर 2024 से किराया नहीं चुकाया है और उसने परिसर खाली कराने के लिए बेदखली की कार्रवाई शुरू करने की मंशा जताई।

हाईकोर्ट की टिप्पणी

मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि याचिकाकर्ता अभी भी उस परिसर के कब्जे में है और बिजली आपूर्ति बंद होने के कारण वह अपना कोचिंग सेंटर नहीं चला पा रहा है।

अदालत ने कहा कि ऐसी स्थिति में बिजली आपूर्ति बहाल की जानी चाहिए ताकि व्यक्ति अपनी आजीविका चला सके।

अदालत के निर्देश

अदालत ने अपने आदेश में निम्न निर्देश दिए:

  • परिसर में सात दिनों के भीतर बिजली आपूर्ति बहाल की जाए।
  • याचिकाकर्ता को उपभोग की गई बिजली का मासिक बिल सब-मीटर के आधार पर चुकाना होगा।
  • प्रतिवादी द्वारा मांग किए जाने के तीन दिनों के भीतर बिजली शुल्क का भुगतान करना होगा।

विवाद होने पर ट्रायल कोर्ट का विकल्प

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि भुगतान या अन्य किसी विषय को लेकर विवाद उत्पन्न होता है, तो दोनों पक्ष संबंधित ट्रायल कोर्ट का रुख कर सकते हैं

मूल विवाद पर कोई टिप्पणी नहीं

हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि उसने इस आदेश में मकान मालिक और किरायेदार के बीच चल रहे मूल विवाद के गुण-दोष पर कोई राय व्यक्त नहीं की है

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अदालत ने कहा कि इस मामले में दोनों पक्षों के सभी अधिकार और दावे भविष्य में कानूनी प्रक्रिया के तहत तय किए जाएंगे।

यह आदेश Randhir Kumar Singh v. Manjeet Solanki मामले में पारित किया गया।


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