तेलंगाना हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को मंदिरों, अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों के पास नॉन-वेज भोजन की बिक्री को लेकर एक समान नीति बनाने का निर्देश दिया है। नीति के अभाव से विवाद और असंगत कार्रवाई की बात कही गई।
तेलंगाना हाईकोर्ट ने मंदिरों, अस्पतालों और शिक्षण संस्थानों के आसपास नॉन-वेज भोजन की बिक्री को लेकर बढ़ते विवादों पर सख्त रुख अपनाते हुए राज्य सरकार को स्पष्ट और एकरूप दिशानिर्देश तैयार करने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि नीति के अभाव में कारोबारी और प्रशासन—दोनों असमंजस में हैं।
यह टिप्पणी हैदराबाद के एक रेस्टोरेंट संचालक की याचिका पर सुनवाई के दौरान की गई, जिसने आरोप लगाया कि मंदिर के पास नॉन-वेज रेस्टोरेंट खोलने को लेकर नगर निगम और पुलिस हस्तक्षेप कर रही है, जबकि आसपास ऐसे अन्य प्रतिष्ठान पहले से चल रहे हैं।
शराब पर रोक, नॉन-वेज पर नहीं: कोर्ट की टिप्पणी
न्यायमूर्ति बी. विजयसेन रेड्डी की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि जहां धार्मिक स्थलों के पास शराब बिक्री पर स्पष्ट कानूनी प्रतिबंध मौजूद हैं, वहीं नॉन-वेज भोजन की बिक्री को लेकर कोई ठोस वैधानिक ढांचा नहीं है। यही स्थिति असमान कार्रवाई और टकराव का कारण बन रही है।
क्या होगी नई नीति में?
अदालत ने संकेत दिया कि प्रस्तावित नीति बनाते समय धार्मिक भावनाओं, सार्वजनिक शांति, यातायात, स्वच्छता और कानून-व्यवस्था जैसे पहलुओं को ध्यान में रखा जाना चाहिए। संवेदनशील इलाकों में पुलिस से पूर्व अनुमति या NOC की व्यवस्था भी नीति का हिस्सा हो सकती है।
अंतरिम राहत नहीं, यथास्थिति कायम
जब तक सरकार नई नीति को अंतिम रूप देकर अधिसूचित नहीं कर देती, तब तक हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि याचिकाकर्ता अपना रेस्टोरेंट शुरू नहीं करेगा। अदालत ने कहा कि यह आदेश केवल यथास्थिति बनाए रखने के लिए है, ताकि भविष्य में समान और निष्पक्ष नियम लागू किए जा सकें।
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