गुजरात हाईकोर्ट आर्बिट्रेशन सेंटर की नई इमारत की आधारशिला रखी गई

गुजरात हाईकोर्ट ऑडिटोरियम में “Institutional Arbitration at a Crossroads: Challenges and the Way Forward” शीर्षक से राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन

CJI जस्टिस सूर्यकांत और मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल की मौजूदगी में गुजरात हाईकोर्ट आर्बिट्रेशन सेंटर की अत्याधुनिक नई इमारत की आधारशिला रखी गई। ‘Institutional Arbitration at a Crossroads’ सम्मेलन का उद्घाटन, नया लोगो, वेबसाइट और न्यूज़लेटर भी लॉन्च।


मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत और गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल की उपस्थिति में गुजरात हाईकोर्ट आर्बिट्रेशन सेंटर की नई अत्याधुनिक इमारत की आधारशिला रखी गई। इसी अवसर पर सेंटर का नया लोगो अनावरण किया गया तथा उसकी पुनःडिज़ाइन की गई वेबसाइट और न्यूज़लेटर भी लॉन्च किए गए।

कार्यक्रम का आयोजन गुजरात हाईकोर्ट के मार्गदर्शन में गुजरात हाईकोर्ट आर्बिट्रेशन सेंटर और गुजरात राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण ने संयुक्त रूप से किया। गुजरात हाईकोर्ट ऑडिटोरियम में “Institutional Arbitration at a Crossroads: Challenges and the Way Forward” शीर्षक से राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन भी किया गया।

CJI का संदेश: विश्वसनीय ढांचा ही भरोसे की कुंजी

CJI जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि आधुनिक आर्बिट्रेशन सेंटर की आधारशिला और संस्थागत मध्यस्थता के भविष्य पर आयोजित यह सम्मेलन देश की विवाद निपटान प्रणाली को सशक्त बनाने में अहम भूमिका निभाएगा।

उन्होंने कहा कि भौतिक अवसंरचना केवल प्रशासनिक व्यवस्था नहीं, बल्कि किसी संस्थान की गंभीरता और विश्वसनीयता का प्रतीक होती है। एक पेशेवर और सुव्यवस्थित आर्बिट्रेशन सेंटर अंतरराष्ट्रीय निवेशकों और पक्षकारों में यह विश्वास पैदा करता है कि उनके विवाद निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से सुलझाए जाएंगे।

CJI ने यह भी रेखांकित किया कि गुजरात औद्योगिक विकास और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अग्रणी राज्य है, ऐसे में विदेशी निवेशकों के लिए पारंपरिक न्यायिक प्रक्रिया की तुलना में संस्थागत आर्बिट्रेशन अधिक प्रासंगिक हो जाता है।

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“कागज़ी नियम पर्याप्त नहीं”

उन्होंने कहा कि केवल नियम बनाना पर्याप्त नहीं है; पारदर्शी और निष्पक्ष प्रक्रियाओं के माध्यम से विश्वास निर्माण जरूरी है। भारत को वैश्विक आर्बिट्रेशन हब बनने के लिए आर्बिट्रेटरों की गुणवत्ता और प्रशिक्षण में निवेश करना होगा।

डिजिटल सुविधाओं—जैसे नई वेबसाइट और न्यूज़लेटर—की शुरुआत की सराहना करते हुए उन्होंने विश्वास जताया कि इससे भारत की आर्बिट्रेशन प्रणाली अधिक कुशल, आधुनिक और भरोसेमंद बनेगी।

मुख्यमंत्री का संबोधन: ‘ग्लोबल आर्बिट्रेशन हब’ की ओर कदम

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में न्याय वितरण प्रणाली को सशक्त बनाने के लिए कई सुधार किए जा रहे हैं, ताकि भारत “Global Arbitration Hub” बन सके।

उन्होंने कहा कि यह दिन गुजरात की न्यायिक प्रणाली के लिए ऐतिहासिक मील का पत्थर है। भारत की प्राचीन पंच परमेश्वर परंपरा और उपनिषदों में वर्णित पंचायत प्रणाली आधुनिक आर्बिट्रेशन की आधारशिला हैं।

महात्मा गांधी का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि एक वकील की सच्ची भूमिका दो विवादित पक्षों को साथ लाना है—और यही दर्शन आज की आर्बिट्रेशन प्रणाली के केंद्र में है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि हाल ही में प्रस्तुत राज्य बजट में विधि विभाग के लिए ₹2,700 करोड़ से अधिक का प्रावधान किया गया है, ताकि न्यायिक अवसंरचना को मजबूत किया जा सके।

उन्होंने कहा कि वैश्विक व्यापार और औद्योगिक निवेश में अग्रणी राज्य होने के नाते गुजरात के लिए त्वरित विवाद निपटान तंत्र Ease of Doing Business को मजबूत करेगा।

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गुजरात हाईकोर्ट की भूमिका

कार्यक्रम की मेजबानी करते हुए गुजरात हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सुनीता अग्रवाल ने स्वागत भाषण दिया और आगामी आधुनिक आर्बिट्रेशन सेंटर की सुविधाओं, निर्माण प्रक्रिया और इसकी आवश्यकता पर विस्तार से प्रकाश डाला।

इस अवसर पर सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस अरविंद कुमार, जस्टिस एन.वी. अंजारिया, जस्टिस विपुल पंचोली, उपमुख्यमंत्री हर्ष सांघवी, गुजरात हाईकोर्ट के कई न्यायाधीश, आर्बिट्रेशन सेंटर के अध्यक्ष जस्टिस ए.वाई. कोगजे, बिल्डिंग कमेटी के अध्यक्ष जस्टिस ए.एस. सुपेहिया और राज्य के महाधिवक्ता कमल त्रिवेदी सहित अनेक गणमान्य उपस्थित रहे।

नई इमारत, डिजिटल प्लेटफॉर्म और संस्थागत सुधारों के साथ गुजरात हाईकोर्ट आर्बिट्रेशन सेंटर को भारत की विवाद समाधान प्रणाली में एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में यह कदम निर्णायक माना जा रहा है।


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