पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बेंच की स्थापना की मांग फिर जोर पकड़ रही है। 22 जिलों के अधिवक्ताओं ने सांसदों का घेराव कर मुद्दा संसद में उठाने की मांग की। सांसदों ने मेरठ, आगरा, बनारस और गोरखपुर में चार हाईकोर्ट बेंच स्थापित करने का प्रस्ताव रखा और केंद्र सरकार से जल्द मुलाकात का आश्वासन दिया।
पश्चिमी यूपी में हाईकोर्ट बेंच की मांग तेज: अधिवक्ताओं ने सांसदों का किया घेराव, चार नई बेंचों का प्रस्ताव उठा
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बेंच की स्थापना की मांग एक बार फिर जोर पकड़ चुकी है। बुधवार को केंद्रीय संघर्ष समिति के आह्वान पर 22 जिलों के अधिवक्ताओं ने अदालतों का कामकाज ठप रखा और अपने-अपने संसदीय क्षेत्रों के सांसदों के आवास पर जाकर धरना–प्रदर्शन किया। वकीलों की प्रमुख मांग—मेरठ में हाईकोर्ट बेंच की स्थापना, ताकि लाखों लोगों को न्याय के लिए 600–700 किलोमीटर दूर इलाहाबाद न जाना पड़े।
🔹 सांसदों के घर पहुंचकर अधिवक्ताओं ने किया प्रदर्शन
मेरठ बार एसोसिएशन और जिला बार एसोसिएशन के सैकड़ों वकील सुबह 10 बजे नानकचंद सभागार में एकत्र हुए। दिनभर न्यायालय का कामकाज बंद रहा और कचहरी परिसर की दुकानों को भी बंद कराया गया। इसके बाद वकीलों का जुलूस क्रमशः—


- बागपत सांसद राजकुमार सांगवान,
- राज्यसभा सदस्य डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी,
- और मेरठ सांसद अरुण गोविल (प्रतिनिधि के माध्यम से)
के आवासों पर पहुंचा, जहां उन्होंने ज्ञापन सौंपते हुए हाईकोर्ट बेंच की मांग को सदन में मजबूती से उठाने की अपील की।
🔹 वाजपेयी के आवास पर शहनाई और रेवड़ी—अनोखा स्वागत
राज्यसभा सदस्य लक्ष्मीकांत वाजपेयी के आवास पर पहुंचते ही अधिवक्ताओं को एक अनोखा दृश्य देखने को मिला—
टेंट, कुर्सियाँ, शहनाई और रेवड़ी–चाय का स्वागत!
वाजपेयी ने कहा—
“मैं यूपी में एक नहीं, चार हाईकोर्ट बेंच—बनारस, गोरखपुर, आगरा और मेरठ—स्थापित करने का प्रस्ताव संसद में रखूंगा। न्याय सस्ता और सुलभ होना चाहिए।”
वकीलों ने इस प्रस्ताव पर सहमति जताई।
🔹 सांसदों का समर्थन—“मैं पहले वकील, बाद में सांसद”
बागपत सांसद राजकुमार सांगवान ने कहा—
“मैं पहले अधिवक्ता हूं, बाद में सांसद। पश्चिम यूपी में हाईकोर्ट बेंच बननी ही चाहिए। हमने सदन में इस मुद्दे को उठाया है और अब कानून मंत्री, गृह मंत्री व प्रधानमंत्री से मिलने का समय मांगा है।”
उन्होंने स्पष्ट कहा कि अब यह मांग अधिवक्ताओं के संघर्ष के बाद पूरी होकर रहेगी।
मेरठ सांसद अरुण गोविल, जो शहर से बाहर थे, ने फोन पर कहा—
“पश्चिम यूपी के लोगों की यह दशकों पुरानी जरूरत है। हमने प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को पत्र भेजकर बैठक का समय मांगा है। अधिवक्ताओं को जल्द इनसे मिलवाया जाएगा।”
🔹 50 वर्षों से चल रहा आंदोलन—न्याय के लिए लंबा संघर्ष
केंद्रीय संघर्ष समिति के चेयरमैन संजय शर्मा और संयोजक राजेंद्र सिंह राणा ने कहा कि—
- पश्चिमी यूपी के करोड़ों लोगों को न्याय पाने के लिए अत्यधिक दूरी और खर्च का बोझ झेलना पड़ता है।
- 50 वर्षों से हाईकोर्ट बेंच की मांग उठ रही है, पर राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी से सफलता नहीं मिली।
- इलाहाबाद हाईकोर्ट का औसत पहुंच–दूरी 600 किमी है, जबकि अन्य बड़े राज्यों में इतनी विषम स्थिति नहीं।
उन्होंने कहा कि न्याय की गारंटी तभी संभव है जब मेरठ में हाईकोर्ट बेंच स्थापित की जाए।
🔹 आंदोलन को मिली नई रफ्तार
तीनों सांसदों के सकारात्मक रुख और चार बेंचों के प्रस्ताव ने आंदोलन को नया जीवन दिया है।
अब अधिवक्ता प्रतिनिधिमंडल जल्द—
- कानून मंत्री,
- गृहमंत्री,
- और प्रधानमंत्री
से मुलाकात करेगा।
सांसदों ने आश्वासन दिया है कि वे इस मुद्दे को संसद में उठाएंगे और इसका समाधान जल्द निकलवाने की कोशिश करेंगे।
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