200 करोड़ उगाही केस: लीना मारिया पॉल की जमानत का दिल्ली पुलिस ने किया विरोध

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सुकेश चंद्रशेखर की पत्नी लीना मारिया पॉल की जमानत याचिका पर सुनवाई

दिल्ली पुलिस ने 200 करोड़ उगाही और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सुकेश चंद्रशेखर की पत्नी लीना मारिया पॉल की जमानत याचिका का विरोध किया। दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई, पुलिस ने ट्रायल में देरी के लिए आरोपियों को जिम्मेदार बताया।


दिल्ली हाईकोर्ट में लीना मारिया पॉल की जमानत पर सुनवाई

Delhi High Court में सुकेश चंद्रशेखर की पत्नी लीना मारिया पॉल की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने जमानत का कड़ा विरोध किया। पुलिस ने अदालत में कहा कि ट्रायल में देरी के लिए स्वयं आरोपी जिम्मेदार हैं और इस आधार पर जमानत नहीं दी जा सकती।

मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति Justice Prateek Jalan कर रहे हैं, जिन्होंने पुलिस की दलीलें सुनने के बाद मामले को 28 मार्च को प्रत्युत्तर (rebuttal arguments) के लिए सूचीबद्ध कर दिया।


पुलिस का दावा: ट्रायल में देरी के लिए आरोपी जिम्मेदार

दिल्ली पुलिस की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता संजय जैन और अधिवक्ता अखंड प्रताप सिंह ने अदालत में दलील दी कि ट्रायल कोर्ट में आरोपियों द्वारा बार-बार स्थगन (adjournment) मांगे जाने के कारण मुकदमे में काफी देरी हुई है।

पुलिस ने यह भी आरोप लगाया कि सुकेश चंद्रशेखर ने कोविड-19 महामारी के दौरान जेल में पूरा एक वार्ड अपने लिए सुरक्षित करा लिया था, जिससे यह संकेत मिलता है कि आरोपी प्रभावशाली हैं और सिस्टम को प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं।


MCOCA और 200 करोड़ उगाही केस में आरोपी

लीना मारिया पॉल और अन्य आरोपियों पर Maharashtra Control of Organised Crime Act (MCOCA) के तहत आरोप लगाए गए हैं। इसके अलावा वे 200 करोड़ रुपये की कथित उगाही और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में भी आरोपी हैं।

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यह मामला Prevention of Money Laundering Act के तहत भी जांच के दायरे में है और उनके खिलाफ कई एफआईआर दर्ज हैं। फिलहाल ट्रायल कोर्ट में आरोप तय (arguments on charge) होने के चरण में मामला लंबित है।


लंबी हिरासत के आधार पर मांगी जमानत

लीना मारिया पॉल ने जमानत याचिका में कहा है कि:

  • वह तीन साल सात महीने से अधिक समय से हिरासत में हैं
  • आरोप अभी तक तय नहीं हुए हैं
  • सह-आरोपियों को जमानत मिल चुकी है
  • PMLA में महिलाओं के लिए जमानत में राहत का प्रावधान है

बचाव पक्ष ने अदालत को बताया कि कई सह-आरोपी जैसे अभिनेत्री Jacqueline Fernandez, प्रदीप रामदानी, अवतार सिंह कोचर और पिंकी ईरानी को जमानत मिल चुकी है। जैकलीन फर्नांडिस को तो जांच के दौरान गिरफ्तार भी नहीं किया गया था।


PMLA की धारा 45 पर बहस

बचाव पक्ष ने Section 45 Prevention of Money Laundering Act के प्रावधान का हवाला दिया, जिसमें महिलाओं के लिए जमानत की शर्तों में कुछ राहत दी जा सकती है।

हालांकि, प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा कि PMLA की धारा 45 की “ट्विन कंडीशन्स” अभी भी लागू होंगी और जमानत पर निर्णय लेते समय आरोपी के आचरण को भी ध्यान में रखना होगा।

PMLA की ट्विन कंडीशन्स के अनुसार:

  1. अदालत को संतुष्ट होना होगा कि आरोपी prima facie दोषी नहीं है
  2. आरोपी जमानत पर छूटने के बाद अपराध नहीं करेगा
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आगे क्या होगा

अब मामले में अगली सुनवाई 28 मार्च को होगी, जब लीना मारिया पॉल की ओर से पुलिस और ED की दलीलों का जवाब दिया जाएगा। इसके बाद अदालत जमानत पर फैसला सुरक्षित रख सकती है या आदेश पारित कर सकती है।


निष्कर्ष

यह मामला केवल जमानत का नहीं बल्कि MCOCA, मनी लॉन्ड्रिंग और संगठित अपराध से जुड़े गंभीर आरोपों का है। अदालत को अब यह तय करना होगा कि लंबी हिरासत, महिला होने और सह-आरोपियों को मिली जमानत के आधार पर राहत दी जाए या ट्रायल में देरी के लिए आरोपियों को जिम्मेदार मानते हुए जमानत खारिज की जाए।


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