इलैयाराजा पर दिल्ली हाईकोर्ट की रोक, सारेगामा को अंतरिम राहत

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दिल्ली हाईकोर्ट ने सारेगामा इंडिया लिमिटेड की याचिका पर संगीतकार इलैयाराजा को कुछ फिल्मी गीतों और साउंड रिकॉर्डिंग्स के लाइसेंस/व्यावसायिक उपयोग से अंतरिम रूप से रोका। कोर्ट ने प्रथमदृष्टया कॉपीराइट अधिकार कंपनी के पक्ष में माना।

Delhi High Court ने दिग्गज संगीतकार Ilaiyaraaja के खिलाफ कॉपीराइट विवाद में Saregama India Limited को बड़ी अंतरिम राहत दी है।

जस्टिस तुषार राव गेडेला ने 13 फरवरी 2026 को पारित आदेश में इलैयाराजा को कुछ निर्दिष्ट साउंड रिकॉर्डिंग्स और संगीत रचनाओं के उपयोग, व्यावसायिक दोहन या लाइसेंस जारी करने से अंतरिम रूप से रोक दिया।

यह आदेश एक वाणिज्यिक वाद (commercial suit) में पारित हुआ, जिसमें सारेगामा ने दावा किया कि 1976 से 2001 के बीच विभिन्न फिल्म निर्माताओं के साथ हुए असाइनमेंट समझौतों के आधार पर उसे अनेक भाषाओं की फिल्मों के गीतों और साउंड रिकॉर्डिंग्स पर विशिष्ट, वैश्विक और स्थायी (perpetual) अधिकार प्राप्त हैं। कंपनी के अनुसार, इन समझौतों के तहत उसे संबंधित सिनेमैटोग्राफ फिल्मों का हिस्सा रहे संगीत कार्यों को पुनरुत्पादित करने, लाइसेंस देने और व्यावसायिक रूप से उपयोग करने का विशेष अधिकार मिला।

विवाद की जड़ क्या है?

याचिका में आरोप है कि फरवरी 2026 से इलैयाराजा ने इन कृतियों पर स्वामित्व का दावा करते हुए तृतीय पक्षों को लाइसेंस देना शुरू किया और गीतों को Amazon Music, iTunes तथा JioSaavn जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर अपलोड किया। सारेगामा का कहना है कि यह न केवल उसके कथित कॉपीराइट का उल्लंघन है, बल्कि बाजार में स्वामित्व को लेकर भ्रम भी पैदा करता है।

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कंपनी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता चंदर एम. लल्ल ने तर्क दिया कि कॉपीराइट कानून के तहत, फिल्मों के लिए रचित संगीत और साउंड रिकॉर्डिंग्स के प्रथम स्वामी (first owner) आमतौर पर फिल्म निर्माता माने जाते हैं, जब तक कि अनुबंध में अन्यथा न कहा गया हो। चूंकि निर्माताओं ने अपने अधिकार कंपनी को असाइन कर दिए थे, इसलिए सारेगामा के पास विशिष्ट अधिकार हैं।

अदालत की प्रारंभिक राय

अदालत ने वादपत्र, दस्तावेज और दलीलों का अवलोकन करने के बाद माना कि वादी ने प्रथमदृष्टया मामला स्थापित किया है। न्यायालय ने कहा कि रिकॉर्ड पर मौजूद असाइनमेंट समझौते यह दर्शाते हैं कि सुविधा का संतुलन (balance of convenience) वादी के पक्ष में है। साथ ही, यदि विवादित कृतियों का निरंतर व्यावसायिक उपयोग जारी रहा तो वादी को ऐसा अपूरणीय नुकसान (irreparable loss) हो सकता है जिसकी भरपाई केवल मौद्रिक क्षतिपूर्ति से संभव नहीं होगी।

इसी आधार पर अदालत ने इलैयाराजा, उनके एजेंटों, लाइसेंसधारकों और सहयोगियों को आदेश दिया कि वे आदेश के परिशिष्ट में सूचीबद्ध फिल्मों से संबंधित साउंड रिकॉर्डिंग्स, संगीत और साहित्यिक कृतियों का उपयोग, दोहन या लाइसेंस जारी न करें और न ही उन पर स्वामित्व का दावा करें।

आगे की प्रक्रिया

अदालत ने वाद में समन जारी करते हुए प्रतिवादी को 30 दिनों के भीतर लिखित बयान दाखिल करने का निर्देश दिया है। अंतरिम निषेधाज्ञा आवेदन पर जवाब चार सप्ताह में और प्रत्युत्तर दो सप्ताह के भीतर दाखिल किया जाएगा। मामले की अगली सुनवाई 2 अप्रैल 2026 को होगी, जबकि 24 अप्रैल 2026 को संयुक्त रजिस्ट्रार के समक्ष सेवा और प्लीडिंग्स की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

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यह आदेश फिलहाल एक्स-पार्टी एड-इंटरिम प्रकृति का है, अर्थात प्रतिवादी का विस्तृत पक्ष सुने बिना पारित किया गया है। अंतिम निर्णय दोनों पक्षों की विस्तृत दलीलों और साक्ष्यों के आधार पर होगा।

यह मामला भारतीय फिल्म संगीत उद्योग में कॉपीराइट स्वामित्व, असाइनमेंट समझौतों और डिजिटल वितरण अधिकारों को लेकर महत्वपूर्ण मिसाल बन सकता है।


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