CAT का बड़ा फैसला: Sameer Wankhede के खिलाफ चार्ज मेमो रद्द, प्रारंभिक जांच सामग्री पर आधारित कार्रवाई असंवैधानिक

CAT ने IRS अधिकारी Sameer Wankhede के खिलाफ जारी चार्ज मेमो को रद्द करते हुए कहा कि प्रारंभिक जांच (SET) सामग्री पर आधारित विभागीय कार्रवाई न्यायिक आदेशों और सेवा कानून के विरुद्ध है।

उपशीर्षक:
केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण ने कहा—न्यायिक आदेशों के बावजूद SET की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट पर भरोसा करना सेवा विधि और निष्पक्षता के सिद्धांतों का उल्लंघन


CAT का बड़ा फैसला: Sameer Wankhede के खिलाफ चार्ज मेमो रद्द, प्रारंभिक जांच सामग्री पर आधारित कार्रवाई असंवैधानिक

नई दिल्ली | 19 जनवरी 2026

केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT), प्रधान पीठ, नई दिल्ली ने IRS अधिकारी समीर वानखेड़े के विरुद्ध शुरू की गई अनुशासनात्मक कार्यवाही को कानूनी रूप से अस्थिर (legally unsustainable) करार देते हुए चार्ज मेमो दिनांक 18 अगस्त 2025 पर आगे की कार्रवाई पर रोक लगा दी है। अधिकरण ने स्पष्ट किया कि यह चार्जशीट विशेष जांच टीम (SET) की उस प्रारंभिक जांच सामग्री पर आधारित थी, जिसके उपयोग पर पहले ही न्यायिक प्रतिबंध लगाया जा चुका था।

CAT ने अपने 19 जनवरी 2026 को उच्चारित आदेश में कहा कि प्राधिकरणों ने स्थापित विधिक सिद्धांतों और बाध्यकारी न्यायिक निर्देशों की अवहेलना करते हुए कार्रवाई की। अधिकरण के अनुसार, जब न्यायालयों ने स्पष्ट रूप से प्रारंभिक जांच के निष्कर्षों को विभागीय आरोपों का आधार बनाने से रोका था, तब उसी सामग्री पर चार्ज मेमो जारी करना यांत्रिक निर्णय-प्रक्रिया और स्वतंत्र मनोयोग के अभाव को दर्शाता है।


प्रारंभिक जांच रिपोर्ट पर निर्भरता अवैध

पीठ ने रेखांकित किया कि चार्ज मेमो पूरी तरह SET की प्रारंभिक जांच के निष्कर्षों और साक्ष्यों पर “आधारित” था। जबकि CAT और संवैधानिक न्यायालयों—विशेषकर दिल्ली उच्च न्यायालय—ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि प्रारंभिक जांच (preliminary enquiry) के निष्कर्षों का उपयोग विभागीय आरोप तय करने के लिए नहीं किया जा सकता।

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अधिकरण ने कहा कि एक बार न्यायालयों द्वारा ऐसी सामग्री के उपयोग पर रोक लगाए जाने के बाद, प्रतिवादी प्राधिकरणों पर उन निर्देशों का पालन करना बाध्यकारी था। इसके बावजूद उसी साक्ष्य-आधार पर आगे बढ़ना सेवा न्यायशास्त्र और निष्पक्षता के सिद्धांतों का उल्लंघन है।


न्यायिक अनुशासन का उल्लंघन

CAT ने यह भी नोट किया कि वह स्वयं पूर्व कार्यवाहियों में निर्देश दे चुका था कि SET रिपोर्ट सहित प्रारंभिक जांच में एकत्र सामग्री का उपयोग किसी भी विभागीय जांच में नहीं किया जा सकता। इन निर्देशों को दिल्ली हाईकोर्ट ने भी संज्ञान में लिया और दोहराया।

इसके बावजूद, प्राधिकरणों द्वारा वही सामग्री आधार बनाकर चार्ज मेमो जारी करना न्यायिक अनुशासन को कमजोर करने वाला कृत्य है, जिससे पूरी अनुशासनात्मक कार्यवाही कानूनी रूप से अवैध हो जाती है।


बॉम्बे हाईकोर्ट में लंबित मामला और अंतरिम संरक्षण

अधिकरण ने यह भी पाया कि जिन तथ्यों और सामग्री पर चार्ज मेमो आधारित था, वही विषयवस्तु बॉम्बे हाईकोर्ट में लंबित कार्यवाही का हिस्सा है, जहां वानखेड़े को अंतरिम संरक्षण प्राप्त है। ऐसे में समान आधार पर विभागीय कार्रवाई शुरू करना और जारी रखना अनुचित है।


अंतरिम रोक की पुष्टि, भविष्य की कार्रवाई पर स्पष्ट चेतावनी

इन निष्कर्षों के आधार पर CAT ने अपनी पूर्व अंतरिम आदेश की पुष्टि करते हुए विभागीय जांच पर रोक बनाए रखी और स्पष्ट किया कि विवादित चार्ज मेमो के तहत आगे कोई कार्रवाई नहीं की जा सकती

हालांकि, अधिकरण ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि भविष्य में अधिकारी के विरुद्ध कोई कार्रवाई की जाती है, तो वह कानून के अनुरूप होनी चाहिए और प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से SET की प्रारंभिक जांच सामग्री पर आधारित नहीं हो सकती

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पृष्ठभूमि

समीर वानखेड़े, 2008 बैच के IRS अधिकारी और नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB), मुंबई के पूर्व जोनल डायरेक्टर, कई उच्च-प्रोफ़ाइल नारकोटिक्स मामलों से जुड़े रहे हैं। बीते वर्षों में विभिन्न न्यायालयों ने उनके खिलाफ प्रारंभिक जांच सामग्री के उपयोग की सीमाओं को स्पष्ट किया है।


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