इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गाजीपुर नगर पालिका के 33 दैनिक/संविदा कर्मियों के नियमितीकरण को वैध बताया। पालिका अध्यक्ष की रोक को रद्द करते हुए नियमित कर्मचारियों जैसा वेतन देने का निर्देश।
इलाहाबाद HC का बड़ा फैसला: नगर पालिका के 33 दैनिक/संविदा कर्मियों का नियमितीकरण बहाल, समान वेतन देने का निर्देश
इलाहाबाद | न्यायालय रिपोर्ट | 2025 — इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नगर पालिका परिषद, गाजीपुर के अधिशासी अधिकारी द्वारा 7 अगस्त 2013 को जारी 33 चतुर्थ श्रेणी दैनिक/संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण आदेश को वैध ठहराते हुए बड़ा फैसला सुनाया है। न्यायालय ने इस पर रोक लगाने के लिए पालिका अध्यक्ष द्वारा 22 अगस्त 2013 को पारित आदेश को निरस्त कर दिया।
न्यायमूर्ति जेजे मुनीर की पीठ ने यह निर्णय जवाहरलाल शर्मा व अन्य 32 कर्मचारियों की ओर से दायर याचिका पर दिया और सभी कर्मचारियों को नियमित कर्मियों के समान वेतन देने का निर्देश दिया।
कौन थे याची?
याचियों ने बताया कि वे 1998 से 2004 के बीच:
- पंप ऑपरेटर
- ट्रैक्टर ड्राइवर
- पाइपलाइन खलासी
- अन्य स्वीकृत चतुर्थ श्रेणी पदों
पर दैनिक वेतनभोगी या संविदा आधार पर कार्यरत थे। अधिशासी अधिकारी ने उनकी लंबी सेवाओं और विभाग में 187 पदों के रिक्त होने के आधार पर उन्हें नियमित करने का आदेश जारी किया था।
पालिका अध्यक्ष की रोक को कोर्ट ने बताया अवैध
पालिका अध्यक्ष ने इस नियमितीकरण निर्णय पर रोक लगा दी थी, जिसे कर्मचारियों ने हाईकोर्ट में चुनौती दी।
हाईकोर्ट ने कहा:
- चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की नियुक्ति करने का अधिकार केवल अधिशासी अधिकारी के पास है।
- इसलिए पालिका अध्यक्ष द्वारा लिया गया रोक लगाने का निर्णय अधिकार क्षेत्र से बाहर और अवैध है।
इस आधार पर कोर्ट ने याचिका स्वीकार कर ली और नियमितीकरण आदेश को बहाल कर दिया।
क्या होगा आगे?
फैसले के बाद:
- सभी 33 कर्मचारियों को नियमित कर्मचारियों के समान वेतनमान मिलेगा।
- उनका नियमितीकरण पुनः प्रभावी माना जाएगा।
- पालिका अध्यक्ष का रोक आदेश अब शून्य माना जाएगा।
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