BCD चुनाव: वोट गिनती विवाद पर दिल्ली हाईकोर्ट का हस्तक्षेप से इनकार, परिणाम से पहले होगी रिकंसिलिएशन
दिल्ली हाईकोर्ट ने BCD चुनाव में अतिरिक्त वोटों के आरोप पर हस्तक्षेप से इनकार किया, कहा—नतीजे घोषित होने से पहले वोटों का मिलान (reconciliation) अनिवार्य।
वोट गिनती विवाद पर हाईकोर्ट का रुख स्पष्ट
Delhi High Court ने बार काउंसिल ऑफ दिल्ली (BCD) चुनाव में कथित अतिरिक्त वोटों की गिनती को लेकर दाखिल याचिका को गुरुवार को निस्तारित कर दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस स्तर पर रिटर्निंग ऑफिसर के फैसले में हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है।
हालांकि, अदालत ने यह भी सुनिश्चित किया कि चुनाव परिणाम घोषित करने से पहले वोटों का रिकंसिलिएशन (मिलान) अनिवार्य रूप से किया जाएगा।
नतीजे से पहले वोटों का मिलान होगा अनिवार्य
मामले की सुनवाई करते हुए Justice Amit Bansal ने कहा कि रिटर्निंग ऑफिसर पहले ही आश्वासन दे चुके हैं कि मतगणना पूरी होने के बाद वोटों का मिलान किया जाएगा।
अदालत ने अपने आदेश में कहा,
“कोर्ट की राय में रिटर्निंग ऑफिसर के निर्णय में हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं बनता। याचिकाकर्ताओं की शिकायत का पर्याप्त समाधान किया जा चुका है। मतगणना पूरी होने के बाद और परिणाम घोषित करने से पहले रिकंसिलिएशन प्रक्रिया की जाएगी।”
9 उम्मीदवारों ने उठाया था ‘अतिरिक्त वोट’ का मुद्दा
यह याचिका 9 उम्मीदवारों द्वारा दाखिल की गई थी, जिनमें Advocate Anushkaa Arora और Shahid Ali शामिल हैं।
याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि डाले गए वोटों की तुलना में गिने गए वोट अधिक हैं, जो चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाता है।
उन्होंने 20 मार्च के रिटर्निंग ऑफिसर के फैसले को चुनौती देते हुए मांग की थी कि मतगणना के दौरान ही तुरंत रिकंसिलिएशन कराया जाए।
रिटर्निंग ऑफिसर का आश्वासन बना आधार
कोर्ट ने अपने फैसले में 20 मार्च के उस संचार का विशेष उल्लेख किया, जिसमें रिटर्निंग ऑफिसर (जो इस न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश भी हैं) ने स्पष्ट किया था कि पूरी मतगणना समाप्त होने के बाद ही वोटों का मिलान किया जाएगा।
अदालत ने इस आश्वासन को पर्याप्त मानते हुए हस्तक्षेप से इनकार कर दिया।
राउंड-1 के बाद रिकंसिलिएशन की मांग खारिज
याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि पहले राउंड की गिनती के बाद कुछ उम्मीदवार बाहर हो जाएंगे, इसलिए उसी चरण पर रिकंसिलिएशन जरूरी है।
इस पर कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता इस संबंध में रिटर्निंग ऑफिसर के समक्ष प्रतिनिधित्व दे सकते हैं, लेकिन न्यायिक हस्तक्षेप आवश्यक नहीं है।
मेंटेनेबिलिटी पर फैसला टला
बार काउंसिल ऑफ दिल्ली की ओर से पेश वकील T Singh Dev ने याचिका की सुनवाई योग्य (maintainability) होने पर आपत्ति जताई थी।
हालांकि, अदालत ने इस मुद्दे पर कोई अंतिम राय नहीं दी और इसे खुला छोड़ते हुए याचिका का निस्तारण कर दिया।
214 वोटों का अंतर बना विवाद की जड़
याचिका के अनुसार, 18 मार्च को पहले दिन (21 फरवरी) की मतगणना पूरी होने पर कुल 17,799 वोट गिने गए थे, जबकि कुल डाले गए वोट 17,585 थे।
इस प्रकार 214 वोटों का अंतर सामने आया, जिसे याचिकाकर्ताओं ने “अस्पष्ट अतिरिक्त” बताया।
तत्काल जांच से इनकार, बाद में होगा मिलान
रिटर्निंग ऑफिसर ने 20 मार्च के अपने संचार में तत्काल जांच से इनकार करते हुए कहा था कि रिकंसिलिएशन एक समय लेने वाली प्रक्रिया है और इसे रोजाना नहीं किया जा सकता।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यह प्रक्रिया पूरी मतगणना खत्म होने के बाद ही की जाएगी—जिसे अब हाईकोर्ट ने भी मान्यता दे दी है।
निष्कर्ष: चुनाव प्रक्रिया जारी, निगाहें अब रिकंसिलिएशन पर
दिल्ली हाईकोर्ट के इस फैसले से यह साफ हो गया है कि फिलहाल मतगणना प्रक्रिया बाधित नहीं होगी।
अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि अंतिम परिणाम घोषित होने से पहले होने वाला वोटों का रिकंसिलिएशन क्या तस्वीर सामने लाता है।
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