ठाणे कोर्ट ने कनाडा में रह रहे दंपति को वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए आपसी सहमति से तलाक की मंजूरी दी, वहीं बलिया में वायुसेना के सेवानिवृत्त अधिकारी से धोखाधड़ी के आरोप में पोते के खिलाफ FIR दर्ज की गई। जानिए दोनों मामलों का कानूनी पहलू।
देश की निचली अदालतों से लेकर जिला न्यायालयों तक, तकनीक और कानून दोनों की भूमिका लगातार बदल रही है। एक ओर जहां अदालतें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए पारिवारिक विवादों का निपटारा कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर पारिवारिक भरोसे के दुरुपयोग से जुड़े आपराधिक मामले भी सामने आ रहे हैं। सोमवार को दो अलग-अलग अदालतों से आईं ये घटनाएं भारतीय न्याय व्यवस्था के इन्हीं दो चेहरों को सामने लाती हैं।
कनाडा में रह रहे दंपति को वीडियो कॉन्फ्रेंस से तलाक की मंजूरी
महाराष्ट्र के ठाणे की एक अदालत ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से सुनवाई करते हुए कनाडा में रह रहे एक दंपति को आपसी सहमति से तलाक लेने की अनुमति दे दी। जिला न्यायाधीश आर. एस. भाकरे ने अपने आदेश में कहा कि दोनों पक्षों ने स्वेच्छा से याचिका दायर की थी और वैवाहिक संबंधों को समाप्त करना “उचित और न्यायसंगत” है।
करीब सात महीने से अधिक समय तक चली कानूनी प्रक्रिया के बाद अदालत ने विवाह को कानूनी रूप से समाप्त करने का आदेश पारित किया। दंपति का विवाह 9 मार्च 2022 को ठाणे के मीरा रोड क्षेत्र में हुआ था। वर्तमान में दोनों कनाडा के ओंटारियो प्रांत में अलग-अलग स्थानों पर रह रहे हैं।
तलाक की याचिका 18 जून 2025 को विशेष विवाह अधिनियम (Special Marriage Act) के तहत दाखिल की गई थी। चूंकि दोनों याचिकाकर्ता भारत से बाहर रह रहे थे, इसलिए कार्यवाही ‘पावर ऑफ अटॉर्नी’ के माध्यम से शुरू की गई। कानून में ‘पावर ऑफ अटॉर्नी’ का अर्थ है किसी अन्य व्यक्ति को अपनी ओर से कानूनी कार्यवाही या निर्णय लेने का अधिकार देना।
अनिवार्य छह महीने की ‘कूलिंग-ऑफ पीरियड’ समाप्त होने के बाद भी दोनों पक्ष अपने निर्णय पर कायम रहे। इसके बाद वे सोमवार को वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए अदालत के समक्ष पेश हुए। न्यायाधीश ने हलफनामों, डिजिटल माध्यम से दी गई गवाही और रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री की समीक्षा करने के बाद आपसी सहमति से तलाक की अनुमति प्रदान कर दी।
यह आदेश एक बार फिर दर्शाता है कि अदालतें तकनीक के माध्यम से प्रवासी भारतीयों से जुड़े पारिवारिक विवादों का समाधान व्यावहारिक ढंग से कर रही हैं।
सेवानिवृत्त वायुसेना अधिकारी से धोखाधड़ी, पोते पर FIR
दूसरी ओर, उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से पारिवारिक विश्वास के दुरुपयोग का एक गंभीर आपराधिक मामला सामने आया है। पुलिस ने वायुसेना के एक सेवानिवृत्त अधिकारी से धोखाधड़ी के आरोप में उनके ही पोते के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है।
पुलिस के अनुसार, बांसडीह उत्तर टोला मोहल्ला निवासी 85 वर्षीय उमाशंकर सिंह, जो अपनी 80 वर्षीय पत्नी के साथ अकेले रहते हैं, की शिकायत पर उनके पोते आर्यन सिंह के खिलाफ FIR दर्ज की गई। शिकायतकर्ता का इकलौता पुत्र भिलाई इस्पात संयंत्र में प्रबंधक के पद पर कार्यरत है और घर से बाहर रहता है।
आरोप है कि पारिवारिक निकटता का लाभ उठाते हुए आर्यन सिंह बैंक से जुड़े कार्यों में मदद के बहाने शिकायतकर्ता के मोबाइल फोन का उपयोग करता था। सितंबर 2025 से जनवरी 2026 के बीच उसने कथित तौर पर शिकायतकर्ता के खाते से अपने और अपने दोस्तों के खातों में कुल 6 लाख 40 हजार रुपये अंतरित कर दिए।
पुलिस ने FIR दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। यह मामला न केवल साइबर और बैंकिंग धोखाधड़ी से जुड़ा है, बल्कि बुजुर्गों के वित्तीय शोषण के बढ़ते मामलों की ओर भी ध्यान दिलाता है।
निष्कर्ष
एक ओर जहां अदालतें तकनीक के सहारे वैवाहिक विवादों का समाधान कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर कानून को पारिवारिक रिश्तों में विश्वासघात जैसे मामलों से भी सख्ती से निपटना पड़ रहा है। ये दोनों घटनाएं दिखाती हैं कि न्याय व्यवस्था आज सामाजिक बदलावों और नई चुनौतियों — दोनों का सामना कर रही है।
SEO Tags:
#वीडियोकॉन्फ्रेंससुनवाई #आपसीसहमति_तलाक #SpecialMarriageAct #ThaneCourt #DivorceLaw #LegalNewsHindi
#धोखाधड़ीमामला #SeniorCitizenFraud #FIRNews #IndianJudiciary #CourtNews
