चेक बाउंस केस: भुगतान न करने पर अभिनेता राजपाल यादव को जेल में सरेंडर करने का दिल्ली हाईकोर्ट का आदेश

दिल्ली हाईकोर्ट ने 2024 के चेक बाउंस मामले में भुगतान न करने पर अभिनेता राजपाल यादव को 4 फरवरी 2026 तक जेल अधीक्षक के समक्ष सरेंडर करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने बार-बार आश्वासन के बावजूद राशि न चुकाने पर कड़ी टिप्पणी की।

दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव को 2024 के चेक बाउंस मामले में भुगतान न करने के कारण जेल में सरेंडर करने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति स्वर्णा कांता शर्मा ने उस याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया, जिसमें यादव ने मई 2024 के सत्र न्यायालय के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसके तहत उन्हें छह महीने की साधारण कारावास की सजा सुनाई गई थी।

मामले में पहले-

2024 में हाईकोर्ट की एक अन्य पीठ ने यादव की सजा इस आश्वासन पर निलंबित कर दी थी कि वह प्रोडक्शन कंपनी के साथ विवाद का सौहार्दपूर्ण निपटारा कर लेंगे और बकाया राशि का भुगतान करेंगे। हालांकि, न्यायालय ने पाया कि बार-बार समय लेने और आश्वासन देने के बावजूद यादव ने भुगतान नहीं किया।

न्यायमूर्ति स्वर्णा कांता शर्मा ने यादव के आचरण की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि अदालत की ओर से बार-बार दी गई रियायतों का उन्होंने दुरुपयोग किया है। आदेश में कहा गया,
“इस न्यायालय का मत है कि याचिकाकर्ता संख्या 1 का आचरण निंदनीय है। बार-बार आश्वासन देने और इस न्यायालय से उदारता की अपेक्षा करने के बावजूद, याचिकाकर्ता संख्या 1 समय-समय पर पारित आदेशों का पालन करने में विफल रहा है।”

अदालत ने भुगतान न हो पाने के लिए डिमांड ड्राफ्ट में कथित ‘अनजानी त्रुटि’ के यादव के स्पष्टीकरण को भी खारिज कर दिया और कहा कि ऐसी किसी त्रुटि को सुधारने के लिए कोई कदम नहीं उठाया गया।

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यादव ने पहले अदालत से अनुरोध किया था कि उन्हें ₹2.5 करोड़ की बकाया राशि दो किश्तों में चुकाने की अनुमति दी जाए—₹40 लाख 16 दिसंबर 2025 तक और शेष ₹2.1 करोड़ 15 जनवरी तक। हालांकि, अदालत ने नोट किया कि अब तक न तो डिमांड ड्राफ्ट रजिस्ट्रार जनरल के पास जमा किए गए हैं और न ही ₹2.10 करोड़ की शेष राशि का भुगतान किया गया है।

वरिष्ठ अधिवक्ता अभिजात, जो यादव की ओर से पेश हुए, ने स्वीकार किया कि उनके मुवक्किल को अनुपालन के लिए कई अवसर दिए जा चुके हैं। इसके बावजूद, जब यादव की ओर से फिर भुगतान की पेशकश की गई, तो अदालत ने उसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि पिछले आचरण को देखते हुए अब किसी भी नए आश्वासन पर भरोसा नहीं किया जा सकता।

अदालत ने रजिस्ट्रार जनरल को निर्देश दिया कि उपलब्ध राशि प्रोडक्शन हाउस को जारी की जाए। साथ ही, राजपाल यादव को 4 फरवरी तक संबंधित जेल अधीक्षक के समक्ष सरेंडर करने का आदेश दिया गया। मामले की अगली सुनवाई 5 फरवरी को सूचीबद्ध है।

कोर्ट ने यह भी उल्लेख किया कि जून 2024 में हुई पहली सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता विकास पाहवा ने यादव की ओर से दलील दी थी कि चेक फिल्म निर्माण के वित्तपोषण के लिए दिया गया था, लेकिन फिल्म के बॉक्स ऑफिस पर असफल रहने से भारी वित्तीय नुकसान हुआ। इसके बाद, समझौते की संभावना को देखते हुए मामला दिल्ली हाईकोर्ट मध्यस्थता केंद्र को भेजा गया था। हालांकि, एक वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बावजूद कोई भुगतान नहीं किया गया।

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अदालत ने अंत में कहा कि बार-बार दिए गए आश्वासनों और undertakings के उल्लंघन के मद्देनज़र अब यादव को दी गई किसी भी और रियायत को जारी रखने का कोई औचित्य नहीं है।


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