दिल्ली हाईकोर्ट से इस्कॉन द्वारका फंड घोटाला मामले में आरोपी को गिरफ्तारी से अंतरिम संरक्षण

दिल्ली हाईकोर्ट ने कुंभ मेला 2025 के दौरान इस्कॉन द्वारका मंदिर के 2–3 करोड़ रुपये के कथित फंड डायवर्जन और ₹21.45 लाख की हेराफेरी के आरोपी राम प्रकाश दुबे को गिरफ्तारी से अंतरिम संरक्षण प्रदान किया। कोर्ट ने एफआईआर दर्ज करने में देरी को अहम आधार माना।


दिल्ली HC ने इस्कॉन मंदिर, द्वारका के कथित करोड़ों रुपये के फंड डायवर्जन मामले में बड़ी राहत देते हुए आरोपी राम प्रकाश दुबे को गिरफ्तारी से अंतरिम संरक्षण प्रदान किया है। न्यायमूर्ति प्रतीक जालान ने यह राहत एफआईआर दर्ज करने में हुई लंबी देरी और मामले की परिस्थितियों को देखते हुए दी।

यह मामला अक्टूबर 2025 में द्वारका नॉर्थ थाना क्षेत्र में दर्ज एफआईआर से जुड़ा है, जिसमें आरोप लगाया गया था कि राम प्रकाश दुबे ने कुंभ मेला 2025 के दौरान इस्कॉन मंदिर के ₹2–3 करोड़ रुपये का गबन किया और ₹21.45 लाख की राशि का दुरुपयोग किया। दुबे की अग्रिम जमानत याचिका ट्रायल कोर्ट द्वारा 12 जनवरी 2026 को खारिज कर दी गई थी।

हाईकोर्ट का अवलोकन

अंतरिम राहत देते हुए हाईकोर्ट ने नोट किया कि एफआईआर में दर्ज आरोपों के अनुसार मंदिर प्रबंधन को कुंभ मेला 2025 के दौरान ही कथित वित्तीय अनियमितताओं और रिकॉर्ड नष्ट किए जाने की जानकारी हो गई थी, इसके बावजूद शिकायत सितंबर 2025 में दर्ज कराई गई।

कोर्ट ने यह भी महत्वपूर्ण तथ्य माना कि आवेदक को 11 जून 2025 को सेवा से हटा दिए जाने का दावा किया गया है, लेकिन एफआईआर के अनुसार, इसके बावजूद 28 जुलाई 2025 को उसे मंदिर के लेखा विभाग में जमा कराने के लिए ₹21.45 लाख की राशि सौंपी गई।

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न्यायमूर्ति प्रतीक जालान ने 29 जनवरी 2026 के आदेश में कहा—

“इन परिस्थितियों में, उपलब्ध सामग्री के प्रथम दृष्टया विचार के आधार पर, मैं इस मत पर हूं कि आवेदक अंतरिम संरक्षण का हकदार है।”

कोर्ट के निर्देश

हाईकोर्ट ने निर्देश दिया है कि:

  • राम प्रकाश दुबे जांच अधिकारी (IO) द्वारा बुलाए जाने पर जांच में शामिल होंगे और पूरा सहयोग करेंगे।
  • अगली सुनवाई तक उन्हें इस एफआईआर के संबंध में गिरफ्तार नहीं किया जाएगा।
  • पुलिस को अगली सुनवाई से तीन दिन पूर्व स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करनी होगी।
  • शिकायतकर्ता सुनीत गोयल को जवाब दाखिल करने की छूट दी गई है।

मामले की अगली सुनवाई 24 मार्च 2026 को निर्धारित की गई है।

दोनों पक्षों की दलीलें

राम प्रकाश दुबे की ओर से अधिवक्ता अमित कुमार ने, अधिवक्ता खुशबू शर्मा के साथ, दलील दी कि उनके मुवक्किल के खिलाफ लगाए गए आरोप 21 अगस्त 2025 को उनके द्वारा भेजे गए कानूनी नोटिस और शिकायत का प्रतिशोध (counterblast) हैं। उन्होंने कहा कि दुबे को 11 जून 2025 को मौखिक आदेश के जरिए हटा दिया गया था और इसके बावजूद एफआईआर दर्ज करने में अनुचित देरी की गई।

वहीं, अतिरिक्त लोक अभियोजक (APP) ने दलील दी कि शिकायत 5 सितंबर 2025 को पुलिस को दी गई थी और प्रारंभिक जांच के बाद 10 अक्टूबर 2025 को एफआईआर दर्ज की गई।

FIR में गंभीर आरोप

FIR के अनुसार, राम प्रकाश दुबे और उनकी पत्नी पर गंभीर वित्तीय कुप्रबंधन, आपराधिक न्यास भंग, रिकॉर्ड नष्ट करने, मारपीट, जबरन वसूली और मंदिर की संपत्ति व धन की चोरी के आरोप लगाए गए हैं। आरोप है कि प्रयागराज में आयोजित कुंभ मेला 2025 के दौरान दुबे को पहले से ही शिकायतों के चलते निगरानी में रखा गया था और इसी दौरान ₹2–3 करोड़ रुपये के अनधिकृत डायवर्जन का खुलासा हुआ। यह भी आरोप है कि वित्तीय गड़बड़ियों को छिपाने के लिए श्रमिक उपस्थिति रजिस्टर नष्ट किया गया और पूछताछ करने पर मंदिर कर्मचारियों के साथ मारपीट की गई।

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