मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का सुधारात्मक कदम —टाइपोग्राफिकल त्रुटि से मिली जमानत, आदेश रद्द
टाइपिंग गलती से मिली जमानत, हाईकोर्ट ने आदेश वापस लिया
Bail granted due to typing mistake, High Court withdraws order
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने एक आरोपी को मिली जमानत का आदेश वापस ले लिया, जिसे न्यायालय के अनुसार टाइपोग्राफिकल त्रुटि Typographical Error के कारण मंजूरी दे दी गई थी, जबकि वास्तविक रूप से उसकी याचिका खारिज होनी चाहिए थी।
यह आदेश न्यायमूर्ति राजेश कुमार गुप्ता की एकल पीठ ने भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 103(1), 296, 115(2), 351(3), 3(5) के तहत दर्ज गंभीर अपराध के मामले में पारित किया।
पृष्ठभूमि
अभियोजन के अनुसार, घटना के दिन शिकायतकर्ता अपने घर पर था जबकि उसका भाई पास के जनरल स्टोर पर बैठा था। अचानक, शिकायतकर्ता ने सुना कि कुछ लोग उसके भाई के बारे में अशोभनीय भाषा का प्रयोग कर रहे हैं। बाहर आने पर उसने देखा कि आरोपी और दो सह-आरोपी लाठी-डंडे और पत्थर लेकर उसके भाई को गालियां दे रहे हैं।
इसके बाद, आरोपियों ने शिकायतकर्ता के भाई पर हमला कर दिया, जिससे गंभीर चोटें आईं और उसकी मृत्यु हो गई। मामले में एफआईआर दर्ज हुई और आरोपी तथा सह-आरोपी दोनों ने जमानत अर्जी दायर की।
मुद्दा कैसे बना
07 अगस्त 2025 के आदेश में, अदालत ने गलती से मुख्य आरोपी की जमानत मंजूर कर ली और सह-आरोपी की अर्जी खारिज कर दी, जबकि असल में उल्टा होना चाहिए था। यह त्रुटि न्यायालय के अनुसार मुद्रण (टाइपिंग) गलती का परिणाम थी।
जब यह तथ्य अदालत के संज्ञान में आया, तो रिकॉर्ड की जांच करने पर न्यायालय ने पुष्टि की कि गलती हुई थी।
अदालत का निर्णय
न्यायालय ने कहा कि आदेश में सुधार आवश्यक है और तदनुसार, दोनों जमानत आवेदनों में पारित पिछले आदेश को वापस ले लिया गया।
📄 मामला: हल्के आदिवासी बनाम मध्य प्रदेश राज्य, एमसीआरसी क्रमांक 28977/2025, निर्णय दिनांक 08-08-2025
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