ड्रोन ट्रेनिंग और आतंकी साजिश केस में 6 यूक्रेनी व 1 अमेरिकी नागरिक न्यायिक हिरासत में
एनआईए की विशेष अदालत ने यूएपीए आतंकी साजिश मामले में 6 यूक्रेनी और 1 अमेरिकी नागरिक को 30 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा, ड्रोन ट्रेनिंग और म्यांमार के उग्रवादी समूहों से संबंधों की जांच जारी।
यूएपीए आतंकी साजिश मामले में 7 विदेशी न्यायिक हिरासत में
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की विशेष अदालत ने सोमवार को एक महत्वपूर्ण आदेश पारित करते हुए 6 यूक्रेनी नागरिकों और 1 अमेरिकी नागरिक सहित कुल सात विदेशी आरोपियों को 30 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। विशेष एनआईए न्यायाधीश प्रशांत शर्मा ने सभी आरोपियों को 6 मई तक न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया।
इन आरोपियों को एनआईए हिरासत की अवधि समाप्त होने के बाद अदालत में पेश किया गया था, जिसके बाद एजेंसी ने न्यायिक हिरासत की मांग की थी, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया।
अमेरिकी नागरिक ने परिवार से वर्चुअल मुलाकात की मांग की
अमेरिकी नागरिक मैथ्यू आरोन वैन डाइक ने अपने परिवार के सदस्यों से वर्चुअल मुलाकात की अनुमति देने के लिए अदालत में आवेदन दायर किया है। अदालत ने इस आवेदन पर एनआईए को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है और मामले की सुनवाई 8 अप्रैल के लिए सूचीबद्ध की है।
वहीं, बचाव पक्ष के वकीलों ने आरोपियों से कानूनी मुलाकात की अनुमति भी मांगी, जिस पर अदालत ने एनआईए से प्रतिक्रिया मांगी है। मामले की सुनवाई पटियाला हाउस कोर्ट में बंद कमरे में की गई।
एनआईए का आरोप – म्यांमार के उग्रवादी समूहों को ड्रोन ट्रेनिंग
एनआईए के अनुसार जांच में सामने आया है कि आरोपी म्यांमार के एथनिक आर्म्ड ग्रुप्स (Ethnic Armed Groups) को ड्रोन संचालन, ड्रोन असेंबली और जैमिंग तकनीक की ट्रेनिंग देने की साजिश में शामिल थे। एजेंसी का आरोप है कि ये समूह भारत में सक्रिय प्रतिबंधित उग्रवादी संगठनों को भी समर्थन देते हैं।
जांच एजेंसी ने अदालत को बताया कि आरोपियों के भारत आने, म्यांमार जाने, ड्रोन का उपयोग करने, प्रशिक्षण देने और भारतीय उग्रवादी संगठनों से संभावित संबंधों सहित कई पहलुओं की जांच अभी बाकी है। अदालत ने भी माना कि मामले के तथ्य संवेदनशील और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े हैं।
भारत में टूरिस्ट वीजा पर आए, फिर मिजोरम से म्यांमार पहुंचे
एनआईए के अनुसार 14 यूक्रेनी नागरिक अलग-अलग तारीखों में टूरिस्ट वीजा पर भारत आए थे। इसके बाद वे गुवाहाटी पहुंचे और वहां से बिना आवश्यक अनुमति के मिजोरम के संरक्षित क्षेत्र में गए और फिर अवैध रूप से म्यांमार में प्रवेश किया।
जांच एजेंसी का आरोप है कि आरोपी यूरोप से ड्रोन का बड़ा कंसाइनमेंट भारत के रास्ते लाए और म्यांमार में उग्रवादी समूहों को प्रशिक्षण देने में शामिल थे।
यूएपीए की धारा 18 के तहत आतंकी साजिश का मामला
आरोपियों के खिलाफ यूएपीए की धारा 18 (आतंकी साजिश) और भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत मामला दर्ज किया गया है। एनआईए का आरोप है कि आरोपी आतंकवादी गतिविधियों में शामिल लोगों के संपर्क में थे और उन्हें हथियार, तकनीकी उपकरण और प्रशिक्षण उपलब्ध कराने में मदद कर रहे थे।
अदालत ने पहले रिमांड आदेश में भी कहा था कि एफआईआर में राष्ट्रीय सुरक्षा और भारत के हितों के खिलाफ अवैध गतिविधियों के आरोप स्पष्ट रूप से उल्लेखित हैं और प्रथम दृष्टया यूएपीए की धारा 18 लागू होती है।
राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा संवेदनशील मामला
अदालत ने मामले को संवेदनशील बताते हुए कहा कि जांच के कई महत्वपूर्ण पहलू अभी सामने आने बाकी हैं, इसलिए आरोपियों की हिरासत आवश्यक है। एनआईए इस मामले में अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क, ड्रोन तकनीक प्रशिक्षण और भारतीय उग्रवादी संगठनों से संभावित संबंधों की जांच कर रही है।
यह मामला राष्ट्रीय सुरक्षा, सीमा पार उग्रवादी नेटवर्क और ड्रोन युद्ध तकनीक के संभावित उपयोग से जुड़ा होने के कारण बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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