सुप्रीम कोर्ट 15 सितंबर को वक्फ (संशोधन) अधिनियम 2025 पर अंतरिम राहत से जुड़ी याचिकाओं पर आदेश सुनाएगा। याचिकाकर्ताओं ने कानून को असंवैधानिक बताते हुए चुनौती दी थी, जबकि केंद्र ने इसे केवल संपत्ति प्रबंधन से जुड़ा संशोधन बताया।
वक्फ (संशोधन) अधिनियम 2025 पर रोक संबंधी अंतरिम आदेश 15 सितंबर को सुनाएगा सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट में क्या हो रहा है?
सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ (संशोधन) अधिनियम 2025 को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं पर अंतरिम राहत देने से जुड़े आदेश को 15 सितंबर को सुनाने का ऐलान किया है।
मुख्य न्यायाधीश डी.आर. गवई और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने 22 मई को सुनवाई पूरी कर आदेश सुरक्षित रख लिया था।
केंद्र का पक्ष
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि:
- गैर-मुसलमानों को वक्फ बनाने का अधिकार केवल 2013 संशोधन में दिया गया था।
- 1923 कानून में ऐसा प्रावधान नहीं था, क्योंकि आशंका थी कि इसका दुरुपयोग कर लेनदारों से बचने के लिए संपत्ति वक्फ कर दी जाएगी।
- अनुसूचित क्षेत्रों में वक्फ बनाने पर रोक (धारा 3E) आदिवासी समुदायों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए है।
- आदिवासी भूमि को वक्फ के नाम पर हड़पा जा रहा है, और यह प्रवृत्ति खतरनाक है।
अन्य पक्षकारों की दलीलें
वरिष्ठ अधिवक्ता रंजीत कुमार, जो हरियाणा सरकार और एक आदिवासी संगठन की ओर से पेश हुए, ने उदाहरण दिया कि राजस्थान में 500 एकड़ खनन भूमि पर वक्फ का दावा किया गया था।
वहीं, याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यह कानून मुस्लिम समुदाय के साथ भेदभावपूर्ण है और उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है।
पृष्ठभूमि
- 5 अप्रैल 2025 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने वक्फ (संशोधन) बिल 2025 को मंजूरी दी थी।
- इससे पहले संसद में इस पर जोरदार बहस हुई थी।
- केंद्र ने हलफनामा दाखिल कर कहा कि यह संशोधन केवल वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन के धर्मनिरपेक्ष पहलू से जुड़ा है, न कि धार्मिक स्वतंत्रता से।
- केंद्र का तर्क है कि संवैधानिक अदालतें आमतौर पर किसी कानून पर स्टे (रोक) नहीं लगातीं और मामले का अंतिम निपटारा ही करती हैं।
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