थाई अदालत ने पूर्व प्रधानमंत्री तक्सिन शिनावात्रा के खिलाफ राजद्रोह मामला साक्ष्य के अभाव में किया खारिज
Thai court dismisses treason case against former PM Thaksin Shinawatra due to lack of evidence
थाईलैंड की अदालत ने पूर्व प्रधानमंत्री तक्सिन शिनावात्रा के खिलाफ राजद्रोह मामला सबूतों की कमी के कारण खारिज किया। अदालत के बाहर समर्थकों ने जश्न मनाया, जबकि तक्सिन और उनकी बेटी प्रधानमंत्री पैटोंगटार्न अभी भी अन्य कानूनी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।
थाईलैंड की एक अदालत ने पूर्व प्रधानमंत्री तक्सिन शिनावात्रा (76) के खिलाफ दर्ज हाई-प्रोफाइल राजद्रोह (Lèse-Majesté) मामला साक्ष्य की कमी के कारण खारिज कर दिया।
अदालत से बाहर निकलते हुए मुस्कुराते हुए तक्सिन ने पत्रकारों से कहा, “मामला खारिज कर दिया गया है।” उनके वकील विनयात चाटमोनट्री ने बताया, “अदालत ने अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत सबूतों को अपर्याप्त मानते हुए आरोपों को खारिज कर दिया।”
मामला क्या था?
यह केस वर्ष 2015 में तक्सिन द्वारा दिए गए एक विदेशी मीडिया इंटरव्यू से जुड़ा था। उन पर आरोप था कि उन्होंने 2014 की सैन्य तख्तापलट (जिससे उनकी बहन यिंगलक शिनावात्रा को सत्ता से बेदखल किया गया था) पर टिप्पणी कर थाईलैंड के राजद्रोह कानूनों का उल्लंघन किया।
बैंकॉक की क्रिमिनल कोर्ट ने शुक्रवार को आदेश पारित करते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष पर्याप्त साक्ष्य पेश करने में असफल रहा, इसलिए मामला आगे नहीं बढ़ाया जा सकता।
अदालत के बाहर जश्न
करीब 150 समर्थक लाल रंग की टी-शर्ट (जो तक्सिन की पार्टी का प्रतीक रंग है) पहनकर अदालत के बाहर मौजूद थे। फैसले की खबर मिलते ही उनमें खुशी की लहर दौड़ गई।
66 वर्षीय विक्रेता कामोल ओराहांता ने कहा — “अदालत ने सही फैसला दिया है, लेकिन अभी हम पूरी तरह निश्चिंत नहीं हो सकते।”
सरकार की प्रतिक्रिया
थाईलैंड के अंतरिम प्रधानमंत्री फुमथाम वेचायाचाई ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह केवल एक न्यायिक प्रक्रिया है और इसका कोई राजनीतिक प्रभाव नहीं होगा। उन्होंने जोड़ा कि तक्सिन द्वारा स्थापित फ्यु थाई पार्टी अभी भी मजबूत मनोबल के साथ खड़ी है।
तक्सिन और शिनावात्रा परिवार की बाकी कानूनी चुनौतियाँ
- पैटोंगटार्न शिनावात्रा (तक्सिन की बेटी और मौजूदा प्रधानमंत्री) के खिलाफ संवैधानिक अदालत अगले हफ्ते निर्णय सुनाएगी। उन्हें एक कथित नैतिक उल्लंघन के आरोप में निलंबित किया गया है।
- सुप्रीम कोर्ट सितंबर में यह तय करेगी कि तक्सिन की छह महीने की अस्पताल हिरासत (2024 में परोल से पहले) को उनकी पुरानी सजाओं में गिना जाए या नहीं। अगर अदालत उनके खिलाफ फैसला देती है, तो उन्हें दोबारा जेल जाना पड़ सकता है।
पृष्ठभूमि
तक्सिन शिनावात्रा ने 2008 से 2023 तक करीब 15 साल स्वैच्छिक निर्वासन में बिताए। 2023 में वे थाईलैंड लौटे।
थाईलैंड में पिछले कुछ वर्षों में 280 से अधिक राजद्रोह मामले दर्ज हुए हैं। आलोचक इसे राजनीतिक विरोध दबाने का हथियार मानते हैं, जबकि राजतंत्र समर्थक इसे सिंहासन की सुरक्षा के लिए आवश्यक बताते हैं।
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