सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश: बिहार चुनावी सूची से बाहर हुए मतदाता ऑनलाइन दे सकेंगे आवेदन
Big order of Supreme Court: Voters left out of Bihar electoral list will be able to apply online
सुप्रीम कोर्ट ने बिहार में मतदाता सूची से बाहर हुए 65 लाख लोगों को राहत देते हुए कहा कि वे अब ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। फॉर्म की फिजिकल कॉपी जमा करना अनिवार्य नहीं होगा। BLAs को मतदाताओं की मदद करने का निर्देश।
बिहार में चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को अहम आदेश दिया। अदालत ने कहा कि ड्राफ्ट मतदाता सूची से बाहर हुए लोग ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं और इसके लिए फॉर्म की भौतिक (physical) कॉपी जमा करना अनिवार्य नहीं है।
जस्टिस सूर्या कांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने स्पष्ट किया कि कोई भी व्यक्ति स्वयं या राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंट्स (BLAs) की मदद से ऑनलाइन आवेदन कर सकता है।
🏛️ कोर्ट की मुख्य टिप्पणियां
- बिहार के 12 मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को निर्देश: अपने BLAs को मतदाताओं की सहायता करने के लिए निर्देश दें।
- कोर्ट ने आश्चर्य जताया कि 1.6 लाख BLAs होने के बावजूद अब तक केवल 2 आपत्तियां दर्ज की गईं।
- बेंच ने कहा कि सभी BLAs को सुनिश्चित करना होगा कि लगभग 65 लाख मतदाता, जो ड्राफ्ट सूची से बाहर हैं (मृतक या स्वेच्छा से स्थानांतरित लोगों को छोड़कर), 1 सितंबर की समयसीमा से पहले आवेदन कर सकें।
- मतदाता फॉर्म 6 में बताए गए 11 दस्तावेजों में से किसी एक या आधार कार्ड की कॉपी देकर खुद को सूची में शामिल करवा सकते हैं।
📑 चुनाव आयोग (ECI) का पक्ष
- ECI ने हलफनामा दायर कर बताया कि 65 लाख मतदाताओं की सूची, जो 1 अगस्त को जारी ड्राफ्ट रोल में शामिल नहीं हुए, बिहार के सभी 38 जिला निर्वाचन अधिकारियों की वेबसाइट्स पर प्रकाशित कर दी गई है।
- सूची में उनके नाम हटाने के कारण भी बताए गए हैं — जैसे मृत्यु, निवास परिवर्तन या डुप्लीकेट एंट्री।
- ECI ने कहा कि सूची की भौतिक प्रतियां पंचायत भवनों, ब्लॉक विकास कार्यालयों और पंचायत कार्यालयों में भी उपलब्ध हैं।
- अखबारों, रेडियो, टीवी और सोशल मीडिया पर सूचना प्रसारित की गई है ताकि लोग आवेदन कर सकें।
📌 मामला क्या है?
- याचिकाएं RJD सांसद मनोज झा, ADR, PUCL, कार्यकर्ता योगेंद्र यादव, TMC सांसद महुआ मोइत्रा और पूर्व विधायक मुजाहिद आलम ने दायर की थीं।
- याचिकाओं में आरोप है कि ECI का 24 जून का आदेश, जिसके तहत लाखों मतदाताओं को नागरिकता का प्रमाण देने को कहा गया, गरीब और हाशिये पर पड़े वर्गों के लिए भेदभावपूर्ण है।
- इसमें यह भी कहा गया कि आधार और राशन कार्ड जैसे व्यापक रूप से प्रयुक्त दस्तावेजों को अस्वीकार कर दिया गया है, जिससे ग्रामीण और कमजोर वर्ग सबसे अधिक प्रभावित होंगे।
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