सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाई, जिसमें POCSO कोर्ट की जज पर कठोर टिप्पणियां करते हुए ACR में प्रतिकूल टिप्पणी दर्ज करने और प्रशिक्षण हेतु मामला भेजने का निर्देश दिया गया था। मामला Sonika Purohit v. State of Rajasthan से जुड़ा है।
SC ने लगाई रोक: राजस्थान HC द्वारा POCSO जज पर की गई सख्त टिप्पणियों पर स्टे
सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान हाईकोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें एक POCSO कोर्ट की महिला जज के खिलाफ कड़ी टिप्पणियां करते हुए उनके वार्षिक गोपनीय प्रतिवेदन (ACR) में प्रतिकूल टिप्पणी दर्ज करने और प्रशिक्षण के लिए मामला भेजने का निर्देश दिया गया था।
मामला सोनिका पुरोहित बनाम स्टेट ऑफ राजस्थान से जुड़ा है। याचिका दायर करने का उद्देश्य दोषसिद्धि को चुनौती देना नहीं, बल्कि हाईकोर्ट की निंदात्मक टिप्पणियों को हटाना और उनसे उत्पन्न किसी भी अनुशासनात्मक या अन्य परिणामों को रोकना था।
पृष्ठभूमि
एक नाबालिग लड़की ने आरोप लगाया था कि एक किशोर ने उसके साथ दुष्कर्म किया और इस कृत्य में उसके पिता ने भी सहयोग किया। किशोर को बालिग मानकर मुकदमा चलाने का आदेश दिया गया और दोनों मामलों की सुनवाई POCSO कोर्ट की उसी विशेष जज ने की। अलग-अलग मुकदमों में सुनवाई होने के बावजूद, दोनों फैसले एक ही दिन सुनाए गए और दोनों अभियुक्तों को दोषी ठहराया गया।
राजस्थान हाईकोर्ट की टिप्पणियां
दोषसिद्ध वयस्क अभियुक्त ने हाईकोर्ट में अपील दाखिल कर सजा निलंबन की मांग की। हालांकि हाईकोर्ट ने सजा पर रोक से इंकार कर दिया, लेकिन ट्रायल जज के खिलाफ कड़े शब्दों का प्रयोग किया।
हाईकोर्ट ने कहा कि:
- 17 गवाहों और 30 दस्तावेजों के बावजूद फैसला “कॉपी-पेस्ट” प्रतीत होता है।
- ऐसा लगता है कि फैसला जज ने स्वयं नहीं लिखा या डिक्टेट किया, बल्कि स्टेनोग्राफर/क्लर्क पर छोड़ दिया।
- जज द्वारा निर्णय पढ़कर सुधार न करने से असंगत पैरा शामिल हो गए।
- “यह चिंताजनक स्थिति है… ऐसा न्यायिक अधिकारी न्यायिक सेवा में रहने योग्य नहीं।”
हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि फैसले की प्रति राजस्थान न्यायिक अकादमी को प्रशिक्षण हेतु भेजी जाए और प्रतिकूल टिप्पणियां संबंधित जज की ACR में दर्ज की जाएं।
सुप्रीम कोर्ट का आदेश
जस्टिस जे.के. महेश्वरी और जस्टिस विजय विष्णोई की पीठ ने याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि फिलहाल हाईकोर्ट के आदेश की अनुपालना पर रोक रहेगी। कोर्ट ने नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब मांगा।
Tags:
#सुप्रीमकोर्टआदेश #राजस्थानहाईकोर्ट #POCSOकोर्ट #SLP2025 #SonikaPurohitCase #StateofRajasthan #SCJudgement #ACR #JudicialRemarks #LegalNews
